Monday, 31 October 2016

कानून को जानें व समझें

 

1. हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण कानून में यह प्रावधान है कि कोई भी हिन्दू चाहे पुरूष हो या स्त्री, उनका दायित्व होगा कि वे अपने अन्य रिश्तेदारों के अतिरिक्त अपने संतान व वृद्ध माता-पिता की परवरिश करेंगे, जिसमें सौतेली मां भी परवरिश पाने की अधिकारिणी है। ऐसा न करने पर उनके विरूद्ध दीवानी अदालत में आवेदन दिया जा सकता है, जिसके लिए निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने का भी प्रावधान है।
2. हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण कानूनों के तहत विवाहित पत्नी, पति की मृत्यु के पश्चात अपने ससुर से भरण-पोषण पाने की हकदार होती है, बशर्ते उसके पास आय का कोई साधन न हो।
3. शासन की शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना, निःशक्त जन छात्रवृत्ति योजना चलायी जाती है, जिसकी सम्पूर्ण जानकारी नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत तथा ग्राम पंचायत से प्राप्त कर उसका सम्पूर्ण लाभ नागरिक प्राप्त कर सकता है।
4. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका क्रमांक-173, 177/99 में दिनांक 17.10.2006 को पारित आदेश के अनुसार राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला उत्पीड़न मामले की सतत निगरानी करने, महिला अत्याचार के विरूद्ध कारगर कार्यवाही कर पीड़ित महिलाओं को समुचित मार्गदर्शन एवं सहायता दिलाने के लिये प्रत्येक जिले में महिला उत्पीड़न निवारण समिति का गठन करना आवश्यक किया गया है।
5. राज्य शासन द्वारा समेकित बाल विकास सेवा योजना, पोषण आहार कार्यक्रम, किशोरी शक्ति योजना, स्वयंसुधा, एकीकृत महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम, आयुष्मती योजना, बालिका समृद्धि योजना, दत्तक पुत्री शिक्षा योजना, महिला जागृति शिविर, महिला कोष्ठ की़ ऋण योजना, महिला सशक्तीकरण मिशन, स्व-शक्ति परियोजना कार्यक्रम महिला एवं बाल कल्याण हेतु दिलाया जाता है। इसके साथ ही नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, शासकीय झूला घर, मातृ कुटीर, बालवाड़ी सह संस्कार केन्द्र भी संचालित होते हैं। इन सारी योजनाओं के संबंध में जिला महिला बाल विकास अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
6. यदि आपके द्वारा लिखा गया चैक, बैंक द्वारा बिना भुगतान किये इस कारण वापस लौटा दिया जाता है कि आपके खाते में भुगतान हेतु पर्याप्त धनराशि नहीं है या उस रकम से अधिक है, जिसका बैंक के साथ किये गये करार के द्वारा उस खाते में से संदाय करने का ठहराव किया गया है तो आपका यही कृत्य चैक के प्रति अनादरण तथा अपेक्षापूर्ण कृत्य होगा, जो धारा 138 चैकों का अनादरण अधिनियम के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।
7. किसी भी नागरिक को उसके धर्म, वंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर किसी दुकान, भोजनालय, होटल, मनोरंजन स्थान, कुआं, तालाब, घाट, स्नान घाट, सड़क पर प्रवेश करने या आने-जाने से नहीं रोका जा सकता है। उसे रोकना उसके मौलिक अधिकारों का हनन है।
8. जहां किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के अभिभावक की ईच्छा है कि उस मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को मनोचिकित्सालय में चिकित्सा हेतु भर्ती करवाया जावे, वहां वह प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी से उस संबंध में निवेदन कर सकता है। उस मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के देखभाल का समस्त खर्च शासन को वहन करना पड़ेगा। इसके अलावा प्रत्येक पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी, जिनके थाने की सीमाओं में स्वच्छंद विचरण करते हुये मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति दिखता है तो उसे अपने संरक्षण में लेकर दो घण्टे के अंदर निकटतम मजिस्टेªट के समक्ष प्रस्तुत करना उसका कानूनी दायित्व बताया गया है।
9. जिला उपभोक्ता फोरम, जिसका कार्यालय कलेक्टेªट परिसर में स्थित है, वहां पर कोई भी उपभोक्ता, जिसने उपभोग हेतु सामग्री क्रय की है और उसकी कीमत चुकायी है और उसके पास उस सामग्री को क्रय करने की रसीद है तो वह सामग्री के खराब होने, आशा से कम प्रकृति की होने, गुण या महत्व का कम होने, सामग्री के हानिकारक होने, गंदी या रोगयुक्त होने, सही पैकिंग न होने, अस्वच्छ अवस्था में तैयार होने, विष या कोई हानिकारक वस्तु के मिले होने, जो स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो, जिस डिब्बा में रखी गई हो वह डिब्बा स्वास्थ्य के लिये हानिकारक व जहरीला हो, मिठाई में मिलाया गया रंग या अनुमति से अधिक मात्रा में मिलाया गया रंग, पदार्थ के गुण, महत्व व शुद्धता तय मानक से कम हो, तो उसकी शिकायत सादे आवेदन में पूर्ण विवरण सहित कर सकता है।
इसके अलावा खाद्य पदार्थ को गलत नाम देकर बेचे जाने, अगर उसका नाम किसी दूसरे पदार्थ से ऐसे मेल खाता हो कि ग्राहक धोखा खा जाय, अगर झूठ बोलकर उस पदार्थ को विदेशी बताया गया हो, अगर वह किसी और पदार्थ के नाम से बेचा जाय, अगर उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव करके उसे ज्यादा मूल्य का बताया जाय, अगर उसके पैकिंग के अंदर विवरण न दिया गया हो या गलत विवरण दिया गया हो अथवा लेबल झूठी
कम्पनी बताता हो, अगर वह पोषक आहार के रूप में बनाया गया हो और उसका लेबल उसमें प्रयोग की गई सामग्रियों के बारे में न बताता हो, अगर उसमें कोई भी बनावटी रंग, खुशबू या स्वाद का प्रयोग हुआ हो, जिसके बारे में लेबल पर न लिखा गया हो, अगर उसका लेबल उपभोक्ता संरक्षण नियम, 1986 के बनाये गये नियमों के अनुसार न हो, तो उसकी लिखित शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम में पेश कर संबंधित व्यापारी व कम्पनी
को दण्डित कराया जा सकता है।
10. किसी सामान्य जाति का व्यक्ति अगर किसी अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के व्यक्ति को जातिगत आधार पर उसके साथ छुआछूत के तहत तथा अन्य घिनौने कृत्य अथवा उत्पीड़ित किया जाता है तो उसका कृत्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न एवं छुआछूत निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के तहत दण्डनीय अपराध है।
11. रिश्वत लेना ही नहीं, बल्कि रिश्वत देना भी दण्डनीय अपराध है। यदि कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को रिश्वत देता है या लोक सेवक को भ्रष्ट आचरण या अवैध साधनों द्वारा पदेन कृत्य अनुग्रह करने के लिये उत्प्रेरित करता है तो ऐसी रिश्वत देकर लोक सेवक को गुमराह करने वाले व्यक्तियों को कानून के तहत 5 वर्ष के लिये कारावास से दण्डित किये जाने का प्रावधान है।
12. लोक सेवक के अंतर्गत शासकीय सेवक के अलावा ऐसे सभी व्यक्ति आते हैं जो शासन के किसी पद पर आसीन हैं जिसके आधार पर वे किसी लोक कर्तव्य का पालन करने के लिए प्राधिकृत हैं, जैसे गांव का प्रधान, एम.एल.ए., एम.पी., न्यायालय द्वारा नियुक्त सरकारी वकील भी लोक सेवक है। भ्रष्टाचार का मतलब घूस या रिश्वत लेना अथवा उसके पदीय कृत्य के पालन के साथ परितोषण या ईनाम, अपने पदेन कार्य में अपने पदीय कर्तव्यों के प्रयोग में अनुग्रह दिखाने के लिये, यदि कोई लोक सेवक प्राप्त करता है तो वह पद का दुरूपयोग करता है, जिसके लिए दण्ड का प्रावधान कानून में किया गया है।
13. भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत प्रत्येक गांव के वयस्क व्यक्तियों को प्रति वर्ष 100 दिन का रोजगार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे वयस्क व्यक्ति, अकुशल व्यक्ति, जो शारीरिक कार्य करने हेतु इच्छुक हो, उसे ग्राम पंचायत में अपना नाम, पता व उम्र लिखाकर पंजीयन कराना होगा, जो 5 वर्ष के लिये मान्य होगा। उसे पंचायत द्वारा एक फोटोयुक्त जाब कार्ड जारी किया जायेगा। काम करने के लिये उसे ग्राम पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी को कम से कम 14 दिनों तक लगातार काम करने हेतु आवेदन देना होगा, जिसकी प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर ही उसे रोजगार प्राप्त होगा। ग्राम पंचायत के सूचना पटल तथा कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय पर सूचना टांगी जायेगी, जिसमें काम करने वाले व्यक्ति का नाम, काम का स्थान और काम के लिये कब से जाना है, से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी रहेगी।
महिलाओं को रोजगार प्रदान करने में प्राथमिकता रहेगी और कम से कम एक तिहाई संख्या में महिलायें वहां रोजगार पर रहेंगी। मजदूरी कम से कम 75/-रूपये प्रतिदिन की रहेगी। उसका भुगतान साप्ताहिक होगा। अधिकतम 15 दिनों में भुगतान निश्चित करना होगा। मजदूरी का भुगतान नगद या किसी वस्तु के रूप में होगा। फिर भी एक चौथाई भुगतान नगद के रूप में होगा। काम के समय दुर्घटना की स्थिति में मुफ्त ईलाज का
प्रावधान है। श्रमिक का बैंक या पोस्ट ऑफिस में खाता खोलकर मजदूरी की राशि उसमें जमा कराये जाने का भी प्रावधान है।
14. सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक किसी भी लोक निकाय के दैनिक क्रियाकलापों के संबंध में आवश्यक सूचना प्राप्त कर सकता है। वह निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर सकता है। लोक अधिकारी के पास मौजूद दस्तावेजों और अभिलेखों का निरीक्षण कर सकता है और उनकी प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त कर सकता है।
विकास कार्यों या योजनाओं के निर्माण में लगायी गयी सामग्री के प्रमाणित नमूने ले सकता है। डिस्केट, फ्लापी, टेप, वीडियो कैसेट के रूप में या अन्य किसी इलेक्ट्रानिक रूप से भंडारित की गई सूचनाओं को भी प्राप्त कर सकता है। संबंधित सूचनायें वह उस विभाग के लोक सूचना अधिकारी, सहायक लोक सूचना अधिकारी के समक्ष हिन्दी अथवा अंग्रेजी में आवेदन लिखकर आवश्यक विवरण देकर 10/-रूपये नगद/चालान (जो मुख्य
शीर्ष-0070-उपमुख्य शीर्ष 800-अन्य प्राप्तियों में लोक प्राधिकारी के नाम देय हो) मनीआर्डर, ज्युडिसियल स्टाम्प देकर 10 दिवस के अंदर प्राप्त कर सकता है, अन्यथा अपीलीय अधिकारी के पास 10 दिवस में आवेदन दे सकता है। उसके आदेश से संतुष्टि न हो तो द्वितीय अपील 90 दिन के अंदर राज्य सूचना आयोग, मुख्यालय रायपुर में भी कर सकता है। गरीबी रेखा के नीचे के व्यक्ति को कोई भी फीस नहीं लगती है। समय-समय पर सूचना न देने पर, आवेदन लेने से इंकार करने पर, असद्भावपूर्वक सूचना देने पर, इंकार करने पर, गलत या अपूर्ण या गुमराह करने वाली सूचना देने, सूचना को नष्ट करने पर, आर्थिक दण्ड का प्रावधान है।

3 comments:
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  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 01/11/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    ReplyDelete

महत्वपूर्ण सूचना- इस ब्लॉग में उपलब्ध जिला न्यायालयों के न्याय निर्णय https://services.ecourts.gov.in से ली गई है। पीडीएफ रूप में उपलब्ध निर्णयों को रूपांतरित कर टेक्स्ट डेटा बनाने में पूरी सावधानी बरती गई है, फिर भी ब्लॉग मॉडरेटर पाठकों से यह अनुरोध करता है कि इस ब्लॉग में प्रकाशित न्याय निर्णयों की मूल प्रति को ही संदर्भ के रूप में स्वीकार करें। यहां उपलब्ध समस्त सामग्री बहुजन हिताय के उद्देश्य से ज्ञान के प्रसार हेतु प्रकाशित किया गया है जिसका कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं है।
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