Friday, 23 December 2016

राजूलाल आ. चैनसिंह साहू विरूद्ध महेश बारले आ. मोहनलाल बारले

 

क्‍लेम प्रकरण क्रमांक-128/2014

न्यायालय: प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण दुर्ग  (छत्तीसगढ़)

(पीठासीन अधिकारी: सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू)
संस्थित दिनांक: 12-12-2014
(सी.आई.एस.नं.0002361/2014)
1. राजूलाल आत्मज चैनसिंह साहू, उम्र 42 वर्ष
2. केंवरा साहू जौजे राजूलाल साहू, उम्र 34 वर्ष
दोनों निवासी: ग्राम सेलूद, थाना उतई,
तहसील व जिला दुर्ग (छ.ग.)                                                                    ..... आवेदकगण
।। विरूद्ध ।।
1. महेश बारले आत्मज मोहनलाल बारले, उम्र 28 वर्ष
साकिन: आमनेर, थाना अभनपुर, जिला रायपुर (छ.ग.)
(वैगन आर क्र.सी.जी.07-ए.क्यू /8119 का चालक)
2. दीपक कुमार पाण्डे आत्मज त्रिलोचन पाण्डे,
साकिन: ग्राम गाड़ाडीह, थाना उतई, तहसील
व जिला दुर्ग (छ.ग.)
(वैगन आर क्र.सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 का पंजीकृत स्वामी)
3. मण्डल प्रबंधक,
दि न्‍यू इंढिया इंश्‍योरेंस कम्पनी लिमिटेड,
चौहान प्लाजा, जी.ई.रोड, घड़ी चौक के पास
सुपेला-भिलाई, तहसील व जिला दुर्ग (छ.ग.)
(वैगन आर क्र.सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 का
बीमा कम्पनी)                                                                                       ..... अनावेदकगण
------------------------------------------------
आवेदक गण की ओर से श्री रोहित साहू, अधिवक्ता ।
अनावेदक क्रमांक-1 व 2 द्वारा श्री अजय बर्छिहा, अधिवक्ता ।
अनावेदक क्रमांक-3 द्वारा सुश्री बी.एस.कांति, अधिवक्ता ।
------------------------------------------------
।। अधिनिर्णय ।।
(आज दिनांक: 20 सितम्बर, 2016 को घोषित किया गया)
1- आवेदक गण की ओर से यह आवेदन-पत्र, मोटर दुर्घटना के परिणाम- स्वरूप अजय कुमार, उम्र 14 वर्ष की मृत्यु होने के कारण कुल 7,15,000/-रूपये क्षतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु मोटर यान अधिनियम की धारा-163(क) के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है ।
2- प्रकरण में यह अविवादित है कि दुर्घटना दिनांक: को दुर्घटना कारित वाहन वैगन आर क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 का अनावेदक क्रमांक-1 चालक तथा अनावेदक क्रमांक-2 पंजीकृत स्वामी था एवं उक्त वाहन अनावेदक क्रमांक-3 के पास बीमित था ।
3- आवेदक गण की ओर से प्रस्तुत आवेदन-पत्र संक्षेप में इस प्रकार है कि दिनांक 06-09-2014 को शाम 4.00 बजे अजय कुमार साहू सायकल से लक्की साहू के साथ ट्यूशन पढ़ने अपनी साईड से जा रहा था, तभी अनावेदक क्रमांक-1 अपनी वाहन वैगन आर क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 को तेजी एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए उसे जोरदार ठोकर मारकर दुर्घटना कारित कर दिया, जिससे अजय कुमार साहू को गम्भीर चोटें आयी । उसे उपचार हेतु पं.जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय, सेक्टर-9, भिलाई में भर्ती किया गया, जहां ईलाज के दौरान दिनांक 07-09-2014 को अजय कुमार की मृत्यु हो गई । दुर्घटना की रिपोर्ट थाना उतई, जिला दुर्ग में दर्ज करायी गई, जहां वाहन चालक के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-279, 337, 304(ए) के अंतर्गत अपराध क्रमांक-245/2014 पंजीबद्ध किया गया । दुर्घटना के समय मृतक 14 वर्ष का होकर कक्षा नवी का होनहार विद्यार्थी था एवं आवेदकगण का एकमात्र पुत्र था । मृतक अजय कुमार पढ़ाई के साथ-साथ अपने माता-पिता के टेलरिंग कार्यों में हाथ बंटाता था, जिससे परिवार के लिये प्रतिमाह 2,500/-रुपये बचा लेता था । अजय कुमार के आकस्मिक निधन से परिवार को काफी अपूर्णीय क्षति पहुंची है, अतः अनावेदकगण से कुल 7,15,000/- रूपये क्षतिपूर्ति दिलाये जाने बावत् आवेदन प्रस्तुत किया गया है ।
4- अनावेदक क्रमांक-1 एवं 2 की ओर से इस आशय का जवाबदावा प्रस्तुत किया गया है कि उक्त दुर्घटना, मृतक अजय कुमार के लापरवाहीपूर्वक कृत्य के कारण हुई है, जिसमें अनावेदकगण की कोई लापरवाही नहीं थी । अनावेदक क्रमांक-1 कुशल वाहन चालक है तथा उसके पास वैध ड्राईविंग लाईसेंस है, उसके द्वारा वाहन का सही ढ़ंग से धीरे-धीरे चालन किया जा रहा था । मृतक अजय कुमार बालपन में सायकल को लड़खड़ाते हुए चला रहा था और सायकल को वाहन वेगन आर के पीछे पहिये के अन्दर डाल दिया, जिसकी जानकारी अनावेदक क्रमांक-1 को नहीं है, इसलिये दुर्घटना की सम्पूर्ण जिम्‍मेदारी मृतक अजय कुमार की है । आवेदकगण द्वारा प्रस्तुत दावा झूठा, मनगढंत एवं बनावटी है, उनके द्वारा झूठ का सहारा लेकर कपोल-कल्पित आधारों पर लालच में आकर दुर्भावनापूर्ण दावा पेश किया गया है । दुर्घटना के समय अनावेदक क्रमांक-2 का वाहन अनावेदक क्रमांक-3 बीमा कम्पनी के पास बीमित होने के कारण क्षतिपूर्ति राशि भुगतान करने  का दायित्व अनावेदक क्रमांक-3 पर होगा, अतः अनावेदक क्रमांक-1 व 2 के खिलाफ पेश दावा निरस्त किये जाने योग्‍य है ।
5- अनावेदक क्रमांक-3 बीमा कम्पनी की ओर से, आवेदन-पत्र में उल्लेखित सभी तथ्यो से स्पष्ट इन्कार करते हुए इस आशय का जवाबदावा प्रस्तुत किया गया है कि वाहन दुर्घटना में अजय कुमार की मृत्यु नहीं हुई थी तथा दुर्घटना में वाहन क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू./8119 की संलिप्तता नहीं थी । वाहन स्वामी ने उसे दुर्घटना की कोई लिखित सूचना नहीं दी है । आवेदक गण द्वारा धारा-163(अ) मोटर यान अधिनियम से परे जाकर क्षतिपूर्ति राशि की मांग की गई है । मृतक टेलरिंग कार्य में मदद नहीं करता था और न ही 2500/-रुपये प्रतिमाह आय प्राप्त करता था । आवेदक गण, मृतक पर आश्रित नहीं थे । अतिरिक्त में अभिवचन किया है कि बीमा पॉलिसी के फर्जी होने और बीमा पॉलिसी के शर्तों का उल्लंघन होने से बीमा कम्पनी क्षतिपूर्ति प्रदान करने के लिये दायित्वाधीन नहीं है। आवेदन में उल्लेखित तथ्य असत्य हैं, अतः आवेदक गण का दावा आवेदन निरस्त किया जावे ।
6- उभय-पक्ष के अभिवचनों एवं प्रकरण में संलग्‍न दस्‍तावेजों के आधार पर मेरे पूर्व  पीठासीन न्यायाधीश द्वारा निम्नलिखित वाद-प्रश्‍न विरचित किये गये हैं, जिन पर साक्ष्य-विवेचना एवं विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष  दिया जा रहा है:-
वाद-प्रश्न निष्कर्ष 

वाद-प्रश्‍न क्रमांक-1 पर सकारण निष्कर्ष :-
7- आवेदक गण की ओर से अपने पक्ष के समर्थन में राजूलाल (आ.सा-1) तथा गोपी किशन (आ.सा-2) का कथन कराया गया है । अनावेदकगण की ओर से प्रकरण में कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है ।
8- आवेदक गण की ओर से अभिवचन कर साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है कि मृतक अजय कुमार दिनांक: 06-09-2014 को 16.00 बजे सायकल से ट्यूशन पढ़ने के लिये जा रहा था, तभी अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा वाहन वेगन आर क्रमांक सी.जी. 07-ए.क्‍यू/8119 को तेजी और लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए दुर्घटना कारित कर दिया गया, जिससे आयी चोटों से अजय कुमार की मृत्यु हो गई । आ.सा-1 राजूलाल द्वारा उक्त तथ्‍यों की अपने साक्ष्य में पुष्टि की गई है तथा समर्थन में अन्तिम प्रतिवेदन प्रदर्श पी-1, प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्श पी-2, जप्ती पत्र प्रदर्श पी-3 व प्रदर्श पी-4, मर्ग इंटीमेशन प्रदर्श पी-5, मृत्यु की सूचना प्रदर्श पी-6, नोटिस प्रदर्श पी-7, चिकित्सा रिपोर्ट प्रदर्श पी-8, नक्शा पंचायतनामा प्रदर्श पी-9, शव सुपुर्दनामा प्रदर्श  पी-10, सुपुर्दनामा आदेश प्रदर्श पी-11 एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रदर्श पी-12 प्रकरण में पेश किया गया है ।
9- प्रदर्श पी-1 के अन्तिम प्रतिवेदन के अवलोकन से स्पष्ट है कि अनावेदक क्रमांक-1 महेश बारले के विरूद्ध अपराध, अंतर्गत धारा-279, 337, 304(ए) भारतीय दण्ड संहिता का अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया है । प्रदर्श पी-2 के प्रथम सूचना पत्र में भी लेख है कि वाहन क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू./8119 के चालक द्वारा अजय साहू का एक्सीडेण्ट कर दिया गया है, जिसे ईलाज कराने के लिये अस्पताल लेकर गये हैं । प्रदर्श पी-5 मर्ग इंटीमेशन में दिनांक 07-09-2014 को 2.00 बजे सेक्टर-9 अस्पताल, भिलाई में उपचार के दौरान अजय कुमार की मृत्यु होने का उल्लेख है । मृतक अजय कुमार का मृत्यु प्रमाण-पत्र की छाया-प्रति प्रकरण में संलग्न है । प्रदर्श पी-12 के शव परीक्षण प्रतिवेदन में सिर में चोट होने से अजय कुमार की मृत्यु होने का उल्लेख है ।
10- आ.सा-2 गोपी किशन का साक्ष्य है कि दिनांक 06-09-2014 को उसने तेज रफ्तार कार को अजय को ठोकर मारते हुए देखा था । वह घटनास्थल के समीप काम कर रहा था । अनावेदक क्रमांक-1 और 2 का जवाबदावा में अभिवचन है कि वाहन के पीछे चक्के में मृतक के आ जाने से दुर्घटना हुई । इस प्रकार वाहन के उपयोग से दुर्घटना होना स्वीकृत तथ्य है । इसके अतिरिक्त उपरोक्त साक्ष्य एवं दस्तावेजों का खण्डन नहीं होने से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि दिनांक 06-09-2014 को वाहन क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 द्वारा दुर्घटना कारित करने से अजय कुमार को गम्भीर चोटें आयी, जिससे दिनांक 07-09-2014 को उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई । अतः वाद प्रश्न क्रमांक-1 का निष्कर्ष ’’प्रमाणित’’ में दिया जाता है ।
वाद- प्रश्‍न क्रमांक-2 पर सकारण निष्कर्ष :-
11- उक्त वाद-प्रश्न अनावेदक क्रमांक-3 के अभिवचन के आधार पर विरचित किया गया है, जिससे उक्त वाद-प्रश्न का प्रमाण-भार अनावेदक क्रमांक-3 पर है । प्रकरण में अनावेदक क्रमांक-1 के वैध चालन अनुज्ञप्ति प्रस्तुत किया गया है तथा दुर्घटना दिनांक को प्रभावशील पेकेज पॉलिसी प्राईवेट व्हीकल भी प्रस्तुत किया गया है । अनावेदक क्रमांक-1 और 2 के वैध अनुज्ञप्ति तथा दुर्घटना दिनांक को दुर्घटनाकारित वाहन वैध रूप से बीमित होने के अभिवचन का खण्डन नहीं हुआ है ।
अनावेदक क्रमांक-3 की ओर से प्रकरण में बीमा शर्तों के उल्लंघन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है । उपरोक्त स्थिति में दुर्घटनाकारित वाहन वेगन आर क्रमांक सी.जी.07-ए.क्‍यू/8119 को दुर्घटना दिनांक: को बीमा शर्तों के उल्लंघन में चलाया जाना प्रमाणित नहीं है, अतः वाद-प्रश्न क्रमांक-2 को प्रमाणित न पाते हुए ’’प्रमाणित नहीं’’ का निष्कर्ष दिया जाता है ।
वाद-प्रश्‍न क्रमांक-3 पर सकारण निष्कर्ष :-
12- आवेदक गण ने आवेदन एवं शपथ पत्र में कथन किया है कि उनका पुत्र मृतक अजय कुमार टेलरिंग कार्य में सहायता करता था और 2500/-रुपये मासिक आय प्राप्त करता था । आवेदकगण की ओर से मृतक के आय प्राप्त करने एवं टेलरिंग कार्य में सहयोग करने के सम्बंध में कोई स्वतंत्र साक्षी अथवा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है । इसके विपरीत आवेदन-पत्र एवं साक्ष्य में कथन किया गया है कि मृतक घटना दिनांक: को ट्यूशन पढ़ने जा रहा था और वह कक्षा नवीं का छात्र था । प्रकरण में मृतक अजय कुमार का कक्षा आठवीं का प्रगति-पत्र संलग्न किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि मृतक विद्यार्थी था । आ.सा-1 राजूलाल ने साक्ष्य में कथन किया है कि मृतक नवी कक्षा का विद्यार्थी था, जिससे निष्कर्ष प्राप्त होता है कि मृतक कोई आय प्राप्त नहीं करता था ।
13- आवेदक गण द्वारा मृतक की आयु, आवेदन एवं साक्ष्य में 14 वर्ष होना दर्शायी गई है । मृतक की आयु के सम्बंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है । मर्ग इंटीमेशन प्रदर्श पी-5 एवं शव परीक्षण प्रतिवेदन प्रदर्श पी-6 में मृतक की आयु 14 वर्ष दर्शायी गई है । मृतक अजय कुमार के कक्षा आठवी के प्रगति-पत्र में जन्मतिथि 01-08-2000 दर्शायी गई है, जिससे दुर्घटना दिनांक को क्षतिपूर्ति राशि के निर्धारण के लिये मृतक की आयु 14 वर्ष निर्धारित की जाती है ।
14- माननीय छ.ग.उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा प्रतिपादित न्याय दृष्टान्त श्रीमती सफारी र्बाइ  यूर्यवंशी एवं एक अन्य विरूद्ध अजय कुमार पटेल एवं एक अन्य, 2015(3) ए.सी.सी.डी. 1645 (सी.जी.) में माननीय छ.ग.उच्च न्यायालय द्वारा यह सिद्धान्त प्रतिपादित किये गये हैं कि मृतक की उम्र 12 वर्ष थी, तब उसकी काल्पनिक आय (Notional Income) 30,000/-रुपये निर्धारित किया जाना होगा तथा प्रयोज्य गुणांक 15 का होगा । यह निष्कर्ष दिया जा चुका है कि मृतक कोई आय प्राप्त नहीं करता था, अतः प्रकरण के परिस्थितियों तथा आवेदक गण के सामाजिक, आर्थिक स्थिति को देखते हुए दुर्घटना के वर्ष 2014 में मृतक की काल्पनिक आय 30,000/-रुपये वार्षिक निर्धारित की जाती है । मोटर वाहन अधिनियम की द्वितीय अनुसूची के अनुसार 15 वर्ष की आयु के व्यक्ति के मृत्यु होने पर 15 का गुणक लगाने का प्रावधान किया गया है । इसके अतिरिक्त उक्त न्याय दृष्टान्त के आलोक में अन्य स्वीकृत मदों - अन्तिम क्रियाकर्म, पुत्र के प्रेम-स्‍नेह एवं संरक्षण से वंचित होने हेतु 50,000/-रूपये दिलाया जाना न्यायसंगत प्रतीत होता है। आवेदकगण द्वारा अभिवचन कर, मृतक के मृत्यु पूर्व हुये उपचार का बिल प्रदर्श पी-13 से प्रदर्श पी-17 पेश किया गया है । प्रदर्श पी-14 में 1320/-रुपये, प्रदर्श पी-15 में 11,772/-रुपये व्यय होना दर्शाया गया है, जिसे अनावेदकगण की ओर से कोई चुनौती नहीं दी गई है । अतः अनुसूची के अनुसार चिकित्सा का वास्तविक व्यय के मद में, जो मृत्यु के पहले किया गया है, उसे पूर्णांक में 13,000/-रुपये स्वीकार किया जाना उचित प्रतीत होता है ।

15- जहां तक क्षतिपूर्ति की अदायगी के उत्तरदायित्व का सम्बंध है, अनावेदक क्रमांक-1 दुर्घटनाकारित वाहन ट्रक क्रमांक डब्ल्यू.बी.03-बी/8584 का चालक तथा अनावेदक क्रमांक-2 पंजीकृत स्वामी है एवं दुर्घटना दिनांक को उक्त वाहन अनावेदक क्रमांक-3 के पास बीमित थी, ऐसी स्थिति में इस वाद-प्रश्न को ’’आवेदकगण, अनावेदक क्रमांक-1 से 3 से संयुक्त एवं पृथक्-पृथक् रूप से 5,13,000/- रूपये प्राप्त करने के अधिकारी हैं’’ के रूप में निराकृत किया जाता है। 
 वाद प्रश्‍न क्रमांक-4: सहायता एवं वाद-व्यय:-
16- उपरोक्त साक्ष्य-विवेचना के आधार पर आवेदक गण की ओर से प्रस्तुत आवेदन-पत्र, अंतर्गत धारा-166 मोटर यान अधिनियम, अंशतः स्वीकार करते हुए निम्न आशय का अवार्ड पारित किया जाता है-
1. अनावेदक क्रमांक-1 से 3 संयुक्त एवं पृथक्-पृथक् रूप से आवेदक गण को 5,13,000/-(पांच लाख तेरह हजार) रूपये अवार्ड दिनांक से एक माह के अन्दर अधिकरण के माध्यम से अदा करेंगे ।
2. अनावेदक क्रमांक-1 से 3 संयुक्त एवं पृथक्-पृथक् रूप से आवेदक गण को उक्त राशि पर 06 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज भी आवेदन प्रस्तुति दिनांक से वसूली दिनांक तक अदा करेंगे ।
3. आवेदक गण ने यदि अंतरिम क्षतिपूर्ति प्राप्त किया हो, तो उक्त राशि अवार्ड की मूल राशि में समायोजित किया जावे ।
4. उक्त क्षतिपूर्ति की राशि दोनों आवेदक बराबर-बराबर प्राप्त करेंगे ।
5. आवेदक गण को प्राप्त होने वाली राशि में से 2,00,000-2,00,000 रूपये उनके नाम से पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिये किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि खाता में जमा किया जावेगा, जिस पर वे किसी भी प्रकार की अग्रिम अथवा लोन की सुविधा प्राप्त नहीं कर  सकेंगे तथा परिपक्वता अवधि पूर्ण होने पर सम्पूर्ण राशि वे स्वयं प्राप्त कर सकेंगे ।
6. आवेदक गण, शेष राशि एवं ब्याज की राशि नगद प्राप्त कर सकेंगे ।
7. अधिवक्ता-शुल्क 500/-(पांच सौ) रूपये निर्धारित किया जाता है ।
........... तद्नुसार व्यय-तालिका बनाई जावे ।

 सही/-
दिनांक: 20 सितम्बर, 2016
(सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू)
 प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण
 दुर्ग (छ.ग.)

No comments:
Write comments

महत्वपूर्ण सूचना- इस ब्लॉग में उपलब्ध जिला न्यायालयों के न्याय निर्णय https://services.ecourts.gov.in से ली गई है। पीडीएफ रूप में उपलब्ध निर्णयों को रूपांतरित कर टेक्स्ट डेटा बनाने में पूरी सावधानी बरती गई है, फिर भी ब्लॉग मॉडरेटर पाठकों से यह अनुरोध करता है कि इस ब्लॉग में प्रकाशित न्याय निर्णयों की मूल प्रति को ही संदर्भ के रूप में स्वीकार करें। यहां उपलब्ध समस्त सामग्री बहुजन हिताय के उद्देश्य से ज्ञान के प्रसार हेतु प्रकाशित किया गया है जिसका कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं है।
इस ब्लॉग की सामग्री का किसी भी कानूनी उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हमने सामग्री की सटीकता, पूर्णता, उपयोगिता या अन्यथा के संबंध में कोई ज़िम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर कार्य करने से पहले किसी भी जानकारी को सत्यापित / जांचें और किसी भी उचित पेशेवर से सलाह प्राप्त करें।

Category

149 IPC 295 (a) IPC 302 IPC 304 IPC 354 (3) IPC 399 IPC. 201 IPC 402 IPC 428 IPC 437 IPC 498 (a) IPC 66 IT Act Aanand Math Abhishek Vaishnav Ajay Sahu Ajeet Kumar Rajbhanu Anticipatory bail Arun Thakur Awdhesh Singh Bail CGPSC Chaman Lal Sinha Civil Appeal D.K.Vaidya Dallirajhara Durg H.K.Tiwari HIGH COURT OF CHHATTISGARH Kauhi Lalit Joshi Mandir Trust Motor accident claim News Patan Rajkumar Rastogi Ravi Sharma Ravindra Singh Ravishankar Singh Sarvarakar SC Shayara Bano Smita Ratnavat Temporary injunction Varsha Dongre VHP अजीत कुमार राजभानू अनिल पिल्लई आदेश-41 नियम-01 आनंद प्रकाश दीक्षित आयुध अधिनियम ऋषि कुमार बर्मन एस.के.फरहान एस.के.शर्मा कु.संघपुष्पा भतपहरी छ.ग.टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम छत्‍तीसगढ़ राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण जितेन्द्र कुमार जैन डी.एस.राजपूत दंतेवाड़ा दिलीप सुखदेव दुर्ग न्‍यायालय देवा देवांगन नीलम चंद सांखला पंकज कुमार जैन पी. रविन्दर बाबू प्रफुल्ल सोनवानी प्रशान्त बाजपेयी बृजेन्द्र कुमार शास्त्री भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मुकेश गुप्ता मोटर दुर्घटना दावा राजेश श्रीवास्तव रायपुर रेवा खरे श्री एम.के. खान संतोष वर्मा संतोष शर्मा सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू सरल कानूनी शिक्षा सुदर्शन महलवार स्थायी निषेधाज्ञा स्मिता रत्नावत हरे कृष्ण तिवारी