Saturday, 23 June 2018

छत्तीसगढ़ शासन विरुद्ध पुरूषोत्तम उर्फ छोटू यादव

 

सत्र प्रकरण क्रमांक-150/2017
न्यायालय : प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दुर्ग (छ.ग.)
(पीठासीन अधिकारी : अजीत कुमार राजभानू)
सत्र प्रकरण क्रमांक-150/2017
(अप.क्र.55/2017, थाना कुम्हारी)
संस्थित दिनांक : 08-08-2017
छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा : थाना प्रभारी,
आरक्षी केन्द्र कुम्हारी, जिला दुर्ग (छ.ग.)                                                                        ..... अभियोजन

।। विरुद्ध ।।
1. पुरूषोत्तम उर्फ छोटू यादव पिता संतोष यादव उम्र 19 वर्ष ।
2. मुकेश पटेल पिता भागवत पटेल, उम्र 19 वर्ष ।
3. ताराचंद पटेल उर्फ तमाडू़ पिता संतोष पटेल, उम्र 18 वर्ष ।
4. मुकेश साहू पिता जनकू साहू, उम्र 19 वर्ष ।
5. प्रताप पटेल पिता शत्रुहन पटेल, उम्र 19 वर्ष ।
6. सेतुराम धु्रव उर्फ सेतु पिता पूरन धु्रव, उम्र 22 वर्ष ।
7. रोशन यादव पिता रामनारायण यादव, उम्र 20 वर्ष ।

सभी निवासी : महामाया पारा, बाजार चौक,
पटेल पारा, कुम्हारी, जिला दुर्ग (छ.ग.)                                              ..... अभियुक्तगण

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न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी (कु. रूपल अग्रवाल), भिलाई-3 द्वारा दाण्डिक प्रकरण क्रमांक-331/2017 में पारित उपार्पण आदेश दिनांक 27-07-2017 से उद्भुत सत्र प्रकरण ।
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राज्य की ओर से सुश्री फरिहा अमीन, अपर लाक अभियाजक। अभियुक्तगण की ओर से श्री संतोष शर्मा एवं श्री चेतन तिवारी, अधिवक्तागण ।
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।। निणर्य ।।
(आज दिनांक 30-05-2018 का घाषित किया गया)
1- अभियुक्तगण के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-148, 294, 506(बी) एवं 329 सहपठित धारा-34 के अंतर्गत यह आरोप है कि उन्हांने दिनांक 13-03-2017 को 19.00 बजे विकास मिश्रा के घर के सामने, 320 कॉलोनी अटल आवास, कुम्हारी में आपस में मिलकर सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में हॉकी स्टिक, डण्डा, बेल्ट आदि वस्तुओं से सज्जित होकर जमाव कर, बलवा करते हुये सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में रविभूषण सिंह का मॉं, बहन की गंदी-गंदी अश्लील गाली -गलौज कर रविभूषण सिंह को जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक अभित्रास कारित किया एवं सभी अभियुक्तगण ने एक साथ मिलकर सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में रविभूषण सिंह से शराब पीने के लिय पैसे मांगकर, पैसे देने हेतु मजबूर करने के लिये उद्यापन करते हुये हॉकी स्टिक, लाठी, डण्डा, बेल्ट एवं हाथ-मुक्का से मारकर स्वेच्छया घार उपहति कारित किया ।
2- अभियोजन कहानी का सार संक्षेप में इस प्रकार है कि प्रार्थी विनाद कुमार सिंह द्वारा दिनांक 14-03-2017 को थाना कुम्हारी में इस आशय की रिपार्ट दर्ज करायी गई कि उसका भाई रविभूषण, उसकी मॉं रामावती के साथ 320 कॉलानी अटल आवास, कुम्हारी में रहता है, जो दिनांक 13-03-2017 को अपने घर के सामने खड़ा था, तभी वहां सेतुराम यादव अपने साथियां के साथ मॉं, बहन की गंदी-गंदी गालियां देने लगा, जिसे उसके भाई रविभूषण ने मना किया, तो इसी बात से नाराज होकर यह कहते हुये कि तू हमका मना करने वाला कौन होता है, उसके भाई रविभूषण को मॉं, बहन की गंदी-गंदी गाली देकर जान से मारने की धमकी देते हुये अपने पास रखे डण्डे, हॉकी स्टिक से मारपीट करने लगे, जिससे उसका भाई नीचे गिर गया । वह अपने भाई को उपचार हेतु कृष्णा हॉस्पिटल, कुम्हारी ले गया, जहां से डॉक्टरों के कहने पर सुयश हॉस्पटल, कोटा, रायपुर में लेजाकर भर्ती कराया है । उसका भाई आई.सी.यू. में बेहोश है, ईलाज चल रहा है ।
3- प्रार्थी द्वारा की गई उक्त रिपार्ट के आधार पर थाना कुम्हारी पुलिस के द्वारा भा,द,संहिता की धारा-294, 506(बी) एवं 323/34 के अंतर्गत अपराध क्रमांक 55/2017 पंजीबद्ध कर, प्रकरण विवेचना में लिया गया । आरोपियां की पतासाजी कर उन्हें गिरफ्तार किया जाकर उनका मेमारेण्डम कथन लेखबद्ध किया गया तथा उनके मेमोरेण्डम कथन के आधार पर उनके द्वारा पेश करने पर घटना के समय रविभूषण का मारने में प्रयुक्त हॉकी स्टिक, बेल्ट व डण्डा जप्त किया गया । घटना स्थल का मौका नक्शा बनाया गया । आहत का आयी चोटें हॉकी स्टिक, बेल्ट व डण्डा से आ सकने व उसे पहुंचायी गई चोटों की प्रकृति के सम्बंध में डॉक्टर से क्वेरी की गई । गवाहों के कथन लेखबद्ध किये गये, जिसमें उन्होंने आरापीगण द्वारा प्रार्थी से शराब पीने के लिये पैसे मांगते हुये मॉं, बहन की गाली-गलौज करने तथा आहत द्वारा शराब पीने के लिये पैसे देने से मना करने पर मॉ, बहन की गाली- गलौज करते हुये जान से मारने की धमकी देकर मारपीट करने का कथन किया । तत्पश्चात् विवेचना पूर्ण कर अभियाग-पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (कु.रूपल अग्रवाल), भिलाई-3 के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जा दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 331/2017 के रूप में पंजीबद्ध हुआ तथा अपराध अनन्यतः सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होने से उपार्पण आदेश दिनांक 27-07-2017 के अनुसार उपार्पित किया गया, जो सत्र प्रकरण क्रमांक-150/2017 के रूप में पंजीबद्ध होकर विधिवत् निराकरण हेतु अन्तरण पर इस न्यायालय को प्राप्त हुआ ।




4- तत्कालीन पीठासीन अधिकारी द्वारा अभियुक्तगण के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-148, 294, 506(बी) एवं 329 सहपठित धारा-34 का आराप विरचित किया जाकर, पढकर सुनाये व समझाये जाने पर अभियुक्तगण ने आरोप अस्वीकार कर, विचारण किये जाने का निवेदन किया । अभियाजन साक्षियों के कथनां के उपरान्त धारा 313 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रश्नावली के रूप में अभियुक्तण का परीक्षण कराया गया । धारा-233 दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबन्धां के अनुसार प्रतिरक्षा में प्रवेश कराये जाने पर अभियुक्तगण ने अभियाजन साक्षियां के कथनों को झूठा फंसाने का कथन करते हुए प्रतिरक्षा में किसी भी साक्षी का परीक्षण नहीं कराना व्यक्त किया ।
5- अभियोजन की ओर से अपने पक्ष-समर्थन में साक्षी विनाद कुमार सिंह (अ.सा-1), रविभूषण सिंह (अ.सा-2), डॉ0राजीव साहू (अ.सा-3), मनोज सिंह (असा-4), जी.एन.चौधरी (अ.सा-5) एवं मीलूराम कंवर (अ.सा-6) का कथन कराया गया है ।
6- प्रकरण के निराकरण के लिये विचारणीय बिंदु यह है कि :-
1- क्या अभियुक्तगण ने आपस में मिलकर सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में हॉकी स्टिक, डण्डा, बेल्ट आदि वस्तुओं से सज्जित होकर जमाव कर, बलवा किया ?
2- क्या अभियुक्तगण ने सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में रविभूषण सिंह को मॉं, बहन की गंदी-गंदी व अश्लील गाली-गलौज कर प्रार्थी व अन्य सुनने वालों को क्षोभ कारित किया ?
3- क्या अभियुक्तगण ने रविभूषण सिंह को जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक अभित्रास कारित किया ?
4- क्या अभियुक्तगण ने एक साथ मिलकर सामान्य उद्देश्य के अग्रसरण में रविभूषण सिंह से शराब पीने के लिय पैसे मांगकर, पैसे देने हेतु मजबूर करने के लिये उद्यापन करते हुये हॉकी स्टिक, लाठी, डण्डा, बेल्ट एवं हाथ-मुक्का से मारकर स्वेच्छया घोर उपहति कारित किया ?
।। विचारणीय बिंदु क्रमांक-1 से 4 पर सकारण निष्कर्ष ।।
7- उक्त विचारणीय बिंदु को प्रमाणित करने हेतु अभियाजन की ओर से प्रस्तुत साक्षी विनोद कुमार सिंह (अ.सा-1) ने अपने साक्ष्य में आरापीगण रोशन, छोटू उर्फ पुरूषात्तम, सेतुराम यादव, फंदी उर्फ छोटू को नाम और चेहरे से तथा अन्य आरोपियां को चेहरे से पहचानना कहा है । घटना के सम्बंध में साक्षी का कथन है कि घटना दिनांक को होली के दिन यह अपने परिवार के साथ अटल आवास के दूसरे तल में खड़ा था और आरोपीगण नीचे भूतल में गाली-गलौज कर रहे थे । आरोपीगण का इसके भाई रविभूषण सिंह ने गाली देने से मना किया था, तब आरोपीगण ने इसके भाई से कहा था कि तू हमको मना करने वाला कौन है, और ऐसा करते हुये उसके भाई के साथ डण्डा एवं स्टिक से मारपीट किये थे । आरोपीगण इसके भाई को मारपीट करते हुये खींचकर नीचे भूतल में ले गये थे और अत्यधिक मारपीट किये थे, तब इसका भाई नीचे गिर गया था । आरापीगण ने इसके भाई के उपर पानी डालकर देखा, जब उन्हें काई हलचल नहीं दिखायी दी, तब आरोपीगण उसे छोड़कर चले गये थे । यह अपने भाई का पहले कृष्णा हॉस्पिटल, कुम्हारी चौक लेकर गया था, फिर डॉक्टरां की सलाह पर सुयश अस्पताल, काटा, रायपुर लेजाकर ईलाज कराया था । इसका भाई 24 घण्टे आई.सी.यू. में भर्ती था । घटना की रिपोर्ट इसके भाई मनाज सिंह ने थाना कुम्हारी, दुर्ग में दर्ज करायी थी । देहाती नॉलिसी प्रदर्श पी-1 पर साक्षी ने अ से अ भाग पर अपना हस्ताक्षर होना कहा है ।
8- प्रतिपरीक्षण में इस साक्षी ने अपने पुलिस बयान में अपने परिवार के साथ अटल आवास के दूसरे तल में खड़े होने, आरापीगण द्वारा भूतल में गाली- गलौज करने, आरोपीगण द्वारा इसके भाई को मारपीट करते हुये भूतल में ले जाने और अत्यधिक मारपीट करने और पानी डालकर देखने तथा हलचल नहीं होने पर छोड़कर चले जाने की बात बता देना कहा है । अपने पुलिस बयान में इस बात का उल्लेख नहीं होने के सम्बंध में जानकारी नहीं होना कहा है । इस प्रकार साक्षी द्वारा उपरोक्त तथ्यों को न्यायालय में बढ़ाचढ़ाकर बताया गया है । आगे प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने यह स्वीकार किया है कि पुलिस ने किसी भी आरापी की पहचान नहीं कराया था । यह स्वीकार किया है कि देहाती नॉलिसी प्रदर्श पी-1 में सेतुराम यादव एवं अन्य के विरुद्ध रिपार्ट लिखाया था, शेष आरापियों का नाम नहीं बताया था। स्वतः कहता है कि उस समय उनका नाम इसे नहीं पता था । आगे साक्षी बताता है कि इसके घर के पास दुकान वाला डागेश ने आरापीगण का नाम बताया था । यह अस्वीकार किया है कि यह घटना के समय मौजूद नहीं था और घटना को घटित हाते अपनी ऑंख से नहीं देखा है । यह स्वीकार किया है कि कथित घटना के समय यह अपने भाई का बीच-बचाव नहीं किया था ।
9- इस साक्षी ने यह भी स्वीकार किया है कि उनके घर घटनास्थल से सुयश अस्पताल, रायपुर जाते समय बीच में कुम्हारी पुलिस थाना पड़ता है, लेकिन ये लाग थाना नहीं गये थे । यह स्वीकार किया है कि घटनास्थल घनी आबादी का क्षेत्र है, जहां आसपास के घरां में लाग निवास करते हैं, लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव नहीं किया था । यह स्वीकार किया है कि रिपोर्ट लिखाते समय लाठी, हॉकी स्टिक आदि की बात नहीं बताया था । कंडिका-16 में साक्षी ने कथन किया है कि यह, मनोज सिंह और रविभूषण एक ही माता-पिता की सन्तान हैं और एक साथ निवास करते हैं । यह अस्वीकार किया है कि जिस मकान में खड़े हाना बताया है, वहां यह नहीं रहता है । यह स्वीकार किया है कि घटना होली के त्यौहार के दिन की है और शाम 6.30-7.00 बजे की है, लेकिन यह अस्वीकार किया है कि लोगां के चेहरे में र ंग-गुलाल होने तथा सूर्यास्त होने से अंधेरा होने के कारण किसी को नहीं पहचान पाया था । कंडिका-20 में साक्षी ने स्वीकार किया है कि प्रदर्श पी-1 की देहाती नॉलिसी लिखाते समय इसका रविभूषण से बातचीत नहीं हो पाया था । यह अस्वीकार किया है कि जिस वाहन से इसके भाई का अस्पताल ले गये थे, उस वाहन से इसके भाई का एक्सीडेण्ट हुआ था । यह अस्वीकार किया है कि घटना दिनांक को इसका भाई शराब पीया हुआ था ।
10- साक्षी रविभूषण सिंह (अ.सा-2) प्रकरण में आहत है । इस साक्षी ने आरोपीगण का चेहरे से पहचानना व्यक्त किया है, नाम बताने में असमर्थतता व्यक्त किया है । घटना के सम्बंध में साक्षी का कथन है कि होली के दिन संध्या 5.00-5. 30 बजे आरापीगण और उनके साथ अन्य लोग हुड़दंग कर रहे थे तथा मोहल्ले- वासियों को ललकारकर अश्लील गालियां दे रहे थे । इसने आरोपीगण को घर से दूर जाने का निवेदन किया, तब आरापीगण मारपीट पर उतारू हा गये और एक के बाद एक इसे मारने लगे, जिससे इसे गम्भीर चोटे  आयी और यह मूर्छित हा गया । जब होश आया, तब यह सुयश अस्पताल में था और आई.सी.यी. में भर्ती था । पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा प्रदर्श पी-2 इसके बताये अनुसार तैयार किया था, जिस पर अ से अ भाग पर इसके हस्ताक्षर हैं । साक्षी ने पुलिस को प्रदर्श पी-3 का अपना पुलिस बयान देना स्वीकार किया है ।
11- प्रतिपरीक्षण में इस साक्षी ने अपने पुलिस बयान में यह बता देना कहा है कि आरोपीगण संध्या 5.30 बजे हुड़द ंग कर रहे थे और मोहल्लेवासियों को ललकार रहे थे तथा अश्लील गालियां दे रहे थे । इसके द्वारा आरापीगण को दूर जाने का निवेदन करने पर वे मारपीट पर उतारू होकर इससे मारपीट किये, जिससे गम्भीर चोट आया और मूर्छित हो गया था । उक्त बात पुलिस के बयान में न होने के सम्बंध में साक्षी ने जानकारी नहीं हाना कहा है । कंडिका-6 में साक्षी ने स्वीकार किया है कि घटना से पहले आरोपीगण का नाम नहीं जानता था । घटना के समय यह अकेला था और इसके नजदीक में कोई नहीं था । बेहोश होने के पूर्व घटना के सम्बंध में इसका किसी व्यक्ति से बातचीत नहीं हुआ था । यह भी स्वीकार किया है कि यह साक्ष्य दिनांक का भी आरोपीगण का नाम नहीं जानता है और इसने पुलिस को बयान देते समय किसी आरापी का नाम नहीं बताया था, अगर पुलिस वालां ने लिखा होगा, तो अपने मन से लिख लिया होगा । इसने पुलिस का यह भी नही बताया था कि घटना को किसने देखा है ।
12- आगे प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि घटना दिनांक को यह भी शराब पीया हुआ था । घटनास्थल घनी आबादी क्षेत्र है, जहां आसपास के लाग निवास करते हैं । इसने किसी भी व्यक्ति को घर के बाहर नहीं देखा था । इसका भाई विनोद, इसके माता-पिता एक साथ निवास करते हैं । यह स्वीकार किया है कि घटना के समय इसे बचाने इसके भाई विनाद तथा इसके माता-पिता नहीं आये थे । यह भी स्वीकार किया है कि कथित घटना दिनांक को आरोपीगण एवं अन्य लोगां के साथ जो वाद-विवाद होना बता रहा है, उसका मुख्य कारण आरोपीगण एवं अन्य लोगों के द्वारा अश्लील गालियां देना था, इसके अलावा अन्य किसी बात का लेकर वाद-विवाद नहीं हुआ था । इसने अपने पुलिस बयान में यह नहीं बताया था कि कौन सा आरापी लाठी और अन्य हथियार रखा था, स्वतः कहा कि कुछ लोगां ने हॉकी स्टिक रखा था । यह अस्वीकार किया है कि घटना दिनांक को शराब पीकर वाहन चलाते समय गिरने से इसे चोट आयी थी, इसी कारण इसके परिजनों ने सुयश अस्पताल में भर्ती हाते समय रोड एक्सीडेण्ट से चोट लगना बताया था । अन्य सुझावां का इस साक्षी ने अस्वीकार किया है ।




13- साक्षी मनोज सिंह (अ.सा-4) आहत का भाई है, इसने आरापीगण में से चार-पांच लोगां को चेहरे से पहचानना कहा है, नाम बताने में असमर्थता व्यक्त किया है । घटना के सम्बंध में इसने भी कथन किया है कि घटना दिनांक को हाउसिंग बोर्ड कॉलानी, कुम्हारी स्थित मकान एल.आई.जी. ।-269 में शाम 6.00-6.30 बजे आराम कर रहा था, तभी इसे मोबाईल पर सूचना प्राप्त हुई कि इसके भाई की मृत्यु हो गई है । जब यह कृष्णा हॉस्पिटल, कुम्हारी पहुंचा, तब अस्पताल में इसके परिजन रो रहे थे और डॉक्टर ने बताया दिया था कि इसके भाई रविभूषण की मृत्यु हा गई है, तब यह अपनी ऑटा में रविभूषण का लिटाकर सुयश हॉस्पिटल, रायपुर ले गया था, जहां 8-9 दिनों तक भर्ती रखकर ईलाज किया था । 
14- आगे साक्षी का कथन है कि इसने अपने भाई से घटना के विषय में जानकारी मांगी थी, लेकिन उसने किसी भी आरोपी का नाम नहीं बताया था । थाना कुम्हारी की पुलिस ने इसके सामने आरापीगण के पेश करने पर एक हॉकी एवं एक बेल्ट की जप्ती की थी । यह बताने में साक्षी असफल रहा कि किस आरोपी से हॉकी और किस आरोपी से बेल्ट जप्त किया गया है । जप्ती पत्रक प्रदर्श पी-6 एवं प्रदर्श पी-7 पर साक्षी ने अ से अ भाग पर अपना हस्ताक्षर स्वीकार किया है । प्रतिपरीक्षण में इस साक्षी का कथन है कि घटना के समय इसका भाई विनोद कुमार इसके साथ एल.आई.जी. ।/269, कुम्हारी के मकान में रहता था । इसने अपनी आंखां से अपने भाई रविभूषण के साथ होती घटना का नहीं देखा है । 
15- डॉ0राजीव साहू (अ.सा-3) न्यूरोसर्जन के द्वारा आहत का मुलाहिजा किया गया है । इस साक्षी का कथन है कि यह वर्ष 2011 से सुयश हॉस्पिटल, रायपुर में विजिटिंग न्यूरोसर्जन के पद पर पदस्थ हैं । दिनांक 13-03-2017 को रविभूषण का ईलाज के लिये लाया गया था, परिजनों ने बताया था कि मरीज को दो-तीन लोगां के द्वारा लड़ाई के दौरान चोट आयी थी । इनके द्वारा जांच करने पर पाया गया कि मरीज होश में था, उसका जी.सी.एस.स्कोर (मरीज का न्यूरोलॉजिकल स्थिति) 13/15 था, जो सामान्य से कम था, नॉर्मल व्यक्ति का जी.सी.एस.स्कार 15/15 होता है । परीक्षण में मरीज के चेहरे के दाहिने तरफ 3/2 सें.मी. छिला हुआ चोट का निशान मौजूद था, सिर के सी.टी.स्केन करने पर पता चला कि मरीज के बांये पैराईटा टेम्पारल स्केल्प में सूजन था । इनके मतानुसार मरीज को आयी चोट गम्भीर प्रकृति की थी । उनके द्वारा दिया गया मेडिकल रिपार्ट प्रदर्श पी-4 पर अ से अ भाग पर इनके हस्ताक्षर हैं । 
16- आगे साक्षी का कथन है कि दिनांक 13-05-2017 को थाना कुम्हारी द्वारा प्रस्तुत दो सीलबंद पैकेट में एक हॉकी स्टिक, जिसकी लम्बाई 36 इंच थी एवं एक डण्डा, जिसकी लम्बाई 33 इंच थी, की जांच कर, रिपोर्ट दिया गया था। इनके रिपोर्ट के अनुसार डण्डा एवं हॉकी स्टिक से आहत को आयी चोटें आ सकती हैं । क्वेरी रिपोर्ट प्रदर्श पी-5 पर अ से अ भाग पर इसके हस्ताक्षर हैं । प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि आहत दिनांक 13-03-2017 को उपचार हेतु भर्ती हुआ था और मुलाहिजा रिपार्ट दिनांक 16-03-2017 को तैयार किया गया है । यह स्वीकार किया है कि प्रारम्भिक उपचार इनके द्वारा नहीं किया गया है, प्रारम्भिक उपचार करने वाला डॉक्टर पूछकर इस बात का उल्लेख करता है कि आहत का चोट कैसे आयी थी । यह स्वीकार किया है कि मरीज का सी.टी.स्केन परीक्षण इनके निर्देश पर किया गया है । सी.टी.स्केन रिपोर्ट में मरीज का शराब पीया होना तथा रोड एक्सीडेण्ट लिखा है, स्वतः कहा कि रिपार्ट पी.जी.श्रीधर द्वारा तैयार किया गया है, इसके बारे में वही बता सकते हैं । कंडिका-11 में साक्षी ने स्वीकार किया है कि शराब पीकर वाहन चलाते समय गिरकर किसी कठार वस्तु से टकरा जाने पर इस प्रकार की चोट आ सकती है । 
17- अ.सा-6 मीलूराम कंवर का साक्ष्य है कि थाना कुम्हारी में उप-निरीक्षक के पद पर पदस्थ रहने के दौरान उसने दिनांक 04-04-2017 का आरोपी सेतराम धु्रव उर्फ सेतू को प्रदर्श पी-21 के गिरफ्तारी पत्रक के अनुसार गिरफ्तार किया था। आरोपी सेतराम धु्रव उर्फ सेतू का अपनी अभिरक्षा में लेकर उसके बताये अनुसार गवाहों की उपस्थिति में मेमारेण्डम कथन प्रदर्श पी-23 लेखबद्ध किया था और उसके मेमारेण्डम कथन के आधार पर आरापी द्वारा निकालकर पेश करने पर उसने लकड़ी से बना हुआ हॉकी का स्टिक गवाहां की उपस्थिति में प्रदर्श पी-24 के जप्ती पत्रक के अनुसार जप्त किया था । 
18- प्रतिपरीक्षण में इस साक्षी ने स्वीकार किया है कि देहाती नॉलिसी प्रदर्श पी-1 में आरोपी का नाम सेतुराम यादव एवं अन्य लिखा हुआ है । यह भी स्वीकार किया है कि जिस व्यक्ति का दिनांक 04-07-2017 को हिरासत में लिया गया है, वह सेतुराम यादव नहीं है, बल्कि सेतुराम धु्रव है । साक्षी स्वतः कहता है कि सेतुराम धु्रव ने स्वयं को मामले का आरोपी बताते हुये सरेण्डर किया था । यह स्वीकार किया है कि समर्पण के पूर्व आरोपी ने इसके सामने अपराध स्वीकार नहीं किया था । यह भी स्वीकार किया है कि आहत तथा किसी भी साक्षी ने आरापी सेतराम यादव के हाथ में हॉकी स्टिक हाने का कथन नहीं किया है । यह अस्वीकार किया है कि सेतराम धु्रव से कोई जप्ती नहीं किया गया है । 
19- अ.सा-5 जी.एन.चौधरी का कथन है कि थाना कुम्हारी में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर पदस्थ रहने के दौरान दिनांक 14-03-2017 का सुयश अस्पताल, रायपुर से प्राप्त सूचना के आधार पर प्रार्थी विनाद कुमार सिंह के बताये अनुसार उसने देहाती नॉलिसी प्रदर्श पी-1 तथा देहाती नॉलिसी के आधार पर उसी दिनांक को प्रदर्श पी-8 के अनुसार अपराध पंजीबद्ध किया था । दिनांक 29-05- 2017 का रविभूषण की उपस्थिति में उसके बताये अनुसार घटनास्थल का मौका नक्शा प्रदर्श पी-2 तैयार किया था और घटनास्थल का लाल स्याही से चिन्हांकित किया था । सुयश हॉस्पिटल, रायपुर में आहत रविभूषण के किये जा रहे उपचार एवं उसके आयी चोटां के सम्बंध में जानकारी प्राप्त करने हेतु ज्ञापन प्रेषित किया गया था। विवेचना के क्रम में उसने आरोपी ताराचंद पटेल द्वारा पेश करने पर गवाह मदन सिंह एवं मनोज सिंह की उपस्थिति में प्रदर्श पी-6 के जप्ती पत्र के अनुसार बांस का एक डण्डा तथा आरापी रोशन यादव द्वारा पेश करने पर इन्ही गवाहों के समक्ष उसने एक बेल्ट प्रदर्श पी-7 के जप्ती पत्र के अनुसार जप्त किया था । इसने आरापी पुरूषोत्तम उर्फ छोटू यादव, रोशन यादव, मुकेश पटेल, ताराचंद पटेल, मुकेश साहू एवं प्रताप पटेल को गवाहों की उपस्थिति में गिरफ्तार कर गिरफ्तारी की सूचना उनके परिजनों को दिया था । 
20- इस साक्षी ने आगे यह भी कथन किया है कि आहत रविभूषण का कथन लेने हेतु उसने चिकित्सा अधिकारी, सुयश अस्पताल काटा, रायपुर से अनुमति प्राप्त करने के लिये प्रदर्श पी-17 का ज्ञापन लेखबद्ध किया था तथा आहत का आयी चोटों की प्रकृति जानने के लिये मुख्य चिकित्सा अधिकारी का क्वेरी आवेदन प्रदर्श पी-18 एवं घटना में प्रयुक्त डण्डा, हॉकी स्टिक से आहत को आयी चोटां के विषय में जानकारी प्राप्त करने के लिये प्रदर्श पी-19 के अनुसार क्वेरी आवेदन सुयश हॉस्पिटल, रायपुर प्रेषित किया था । उसने प्रार्थी विनोद कुमार सिंह, आहत रविभूषण सिंह, गवाह रमौती, देवी सिंह एवं मनोज सिंह के बताये अनुसार उनके कथन लेखबद्ध किया था । 
21- प्रतिपरीक्षण में इस साक्षी ने कथन किया है कि घटना की जानकारी पहली बार दिनांक 14-03-2017 को थाने के मोहर्रिर से मिली थी । यह स्वीकार किया है कि अस्पताल के भर्ती कागजात में रविभूषण का भर्ती कराने का कारण एल्काहलिक पेसेन्ट तथा रोड ट्रेफिक एक्सीडेण्ट होना बताया गया था । यह भी स्वीकार किया है कि देहाती नॉलिसी में प्रार्थी विनोद कुमार सिंह ने घटना को स्वय देखना नहीं बताया था । विनाद कुमार, घटनास्थल अटल आवास के पास का निवासी नहीं है । देहाती नॉलिसी में रविभूषण ने किस आरोपी का गाली देने से मना किया था और किस व्यक्ति ने जान से मारने की धमकी दी थी, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं है । यह स्वीकार किया है कि प्रकरण में सेतराम यादव नाम का व्यक्ति गिरफ्तार करना नहीं पाया गया है, इसने मामले के आरापी सेतराम धु्रव का शिनाख्ती कार्यवाही नहीं कराया है । यह भी स्वीकार किया है कि किसी भी आरापी की पहचान भी नहीं करायी है । 




22- आगे प्रतिपरीक्षण की कंडिका-16 में साक्षी ने स्वीकार किया है कि आहत रविभूषण का बयान दिनांक 31-03-2017 का दर्ज किया है । आहत एवं किसी भी साक्षी ने आरोपीगण का नाम बताते समय उसके पिता का नाम, उम्र एवं निवास के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं दिया था । यह स्वीकार किया है कि आहत रविभूषण द्वारा इस बात की जानकारी नहीं दी गई थी कि उसे शराब पीने के लिये पैसे किस व्यक्ति के द्वारा मांगा गया था । यह भी स्वीकार किया है कि आहत एवं अन्य व्यक्तियो ं ने यह नहीं बताया है कि किस व्यक्ति के मारने पर चोट आया था । इस साक्षी ने इस बात को भी स्वीकार किया है कि साक्षी विनोद सिंह के द्वारा देहाती नॉलिसी एवं पुलिस बयान में स्वयं के अटल आवास के दूसरे तल में खड़े होने और आरोपीगण द्वारा नीचे भूतल में गाली-गलौज करने तथा इसके भाई को मारपीट करते हुये खींचकर नीचे भूतल में ले जाने वाली आदि बात नहीं बताई थी । इस बात की जानकारी नहीं होना कहा है कि विनाद कुमार को आरापीगण का नाम राकेश के माध्यम से पता चला था । 
 23- इस साक्षी ने गवाह मनोज सिंह के द्वारा न्यायालय में अतिरिक्त रूप से कथनों को विस्तारित करते हुये बताये गये तथ्यां का पुलिस बयान में नहीं बताने की बात भी स्वीकार किया है । यह स्वीकार किया है कि प्रदर्श पी-9 के दस्तावेज में थाना प्रभारी, सरस्वती नगर, रायपुर की सील लगी हुई है और उसी सील के ऊपर थाना प्रभारी, कुम्हारी, जिला दुर्ग की सील लगी है । प्रदर्श पी-9 का दस्तावेज दिनांक 13-03-2017 को तैयार किया गया है और दिनांक 13-03-2017 का पुलिस थाना कुम्हारी में इस घटना के सम्बंध में कोई अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ था । कंडिका-25 में साक्षी ने स्वीकार किया है कि इनके द्वारा आहत रविभूषण सिंह का कथन लेने हेतु अनुमति बावत् आवेदन-पत्र दिनांक 14-03-2017 को दिया गया था और प्रदर्श पी-17 में चिकित्सक द्वारा मरीज बयान दे सकता है, अनुमति दी जाती है, लिखकर सीलमुद्रा से चिन्हांकित किया गया है । यह स्वीकार किया है कि आहत का बयान दिनांक 21-03-2017 को दर्ज किया गया है, दिनांक 14-03-2017 का अनुमति मिलने के बाद भी बयान दर्ज नहीं किया गया है । 
24- अभियोजन की ओर से प्रस्तुत उक्त साक्षियां के परिप्रेक्ष्य में बचाव-पक्ष की ओर से यह तर्क किया गया है कि मामले में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तथ्य सन्देहास्पद हैं । साक्षी विनोद सिंह (अ.सा-1), जिसके द्वारा देहाती नॉलिसी दर्ज करायी गई है, वह मौके पर उपस्थित नहीं था, अतः घटना के सम्बंध में उक्त साक्षी का कथन विश्वास योग्य नहीं है । आहत को आयी चोटें आरोपीगण द्वारा की गई मारपीट से कारित हाना प्रमाणित नहीं है, बल्कि आहत को अस्पताल में भर्ती कराते समय रोड एक्सीडेण्ट से चोट कारित होने की बात बतायी गई थी, जो अभियोजन के मामले का सन्देहास्पद बनाता है । मामले में घटना, अटल आवास की है, जहां सभी घरों में लोग निवास करते हैं, किन्तु आहत एवं उसके परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त आसपास के किसी भी व्यक्ति को साक्षी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे मामले के साक्षियां के कथनों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है । अभियोजन के साक्ष्य विश्वसनीय नहीं हैं, अतः आरोपीगण की दोषसिद्धि के लिये उक्त साक्ष्य ग्राह्य नहीं है, अतः आरोपीगण दोषमुक्ति के अधिकारी हैं । 
25- जबकि अभियोजन की आेर से यह तर्क किया गया है कि मामले के आहत सहित प्रत्यक्षदर्शी साक्षियां ने घटना का समर्थन किया है । आहत को गम्भीर उपहति कारित होना, चिकित्सीय साक्ष्य से प्रमाणित हुआ है, अतः आरापीगण के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं । 
26- विचार किया गया । मामले में अभियाजन के द्वारा प्रस्तुत कहानी के अनुसार घटना दिनांक का आरोपीगण के द्वारा आहत रविभूषण सिंह के साथ शराब पीने के लिये पैसा मांगा गया और आहत द्वारा मना करने पर उन्हो ंने मॉं, बहन की गाली देकर, जान से मारने की धमकी देकर हॉकी स्टिक, डण्डा, बेल्ट और हाथ- मुक्का से मारपीट किया था, जिससे आहत नीचे गिरकर बेहोश हो गया था । यह घटना दिनांक 13-03-2017 को शाम लगभग 7.00 बजे की बतायी गई है । साक्षी विनोद सिंह, जिसके द्वारा देहाती नॉलिसी दर्ज करायी गई है, उसने देहाती नॉलिसी में शराब के लिये पैसे मांगकर मारपीट करने के तथ्य का हवाला नहीं दिया है, साथ ही एकमात्र आरोपी के रूप में सेतराम यादव को नामजद किया है और उसके साथ अन्य लाग शामिल होना बताया है । अन्य आरापीगण का नाम, साक्षी ने दुकानदार डागेश के माध्यम से पता चलना बताया है, अर्थात् मामले में डागेश भी प्रत्यक्षदर्शी साक्षी था, जिसका परीक्षण नहीं कराया गया है । साक्षी विनोद के अनुसार मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले आहत रविभूषण ने उसे अन्य आरापीगण के बारे में कुछ नहीं बताया था । स्वय ं रविभूषण ने अपने साक्ष्य में आरोपीगण को नाम से नहीं जानना कहा है, अतः देहाती नॉलिसी एवं साक्षी के पुलिस बयान में आरोपीगण के नाम का उल्लेख किस आधार पर आया है, यह स्पष्ट नहीं है । यहां तक कि आरोपी सेतराम यादव के रूप में देहाती नॉलिसी में एक व्यक्ति का आरापित किया गया है, किन्तु सेतराम यादव के नाम के किसी व्यक्ति का मामले में अभियाजित नहीं किया गया है, बल्कि सेतराम धु्रव नामक व्यक्ति का अभियोजित किया गया है, जो मामले में स्वयं न्यायालय के समक्ष समर्पण किया है । यहा ं पर, जबकि आरोपी के नामजद रिपोर्ट में दर्ज नाम एवं अभिरक्षा में लिये गये आरोपी के नाम में भिन्नता है, उस परिस्थिति में पहचान कार्यवाही कराया जाना आवश्यक था, जो मामले में नहींं कराया गया है, जो मामले को प्रभावित करता है । 
27- साक्षीगण ने अपने कथन में व्यक्त किया है कि सभी आरोपीगण ने आहत के साथ मारपीट किया था, किन्तु यह आश्चर्यजनक तथ्य है कि मामले में सात व्यक्ति आरोपित हैं, सभी के द्वारा हॉकी, डण्डा एवं बेल्ट से मारपीट करना बताया गया है, इसके बाद भी आहत के सिर पर मात्र एक चोट के अलावा अन्य किसी प्रकार के चोट का उल्लेख, चिकित्सक साक्षी के द्वारा नहीं किया गया है । अतः उक्त तथ्य इस बात को असम्भावित करते हैं कि सभी आरापीगण के द्वारा मारपीट किया गया था । 
28- जहां तक आहत को आयी चोट की गम्भीरता एवं प्रकृति का प्रश्न है, मामले में घटना की प्रथम बार रिपोर्ट, देहाती नॉलिसी प्रदर्श पी-1 के आधार पर दर्ज की गई है, जा दिनांक 14-03-2017 को 16.50 बजे अभिलिखित किया गया है, जबकि आहत को दिनांक 13-03-2017 को सुयश अस्पताल में भर्ती होना बताया गया है । मुलाहिजा आवेदन प्रदर्श पी-4 के अनुसार दिनांक 13-03-2017 का ही आहत का मुलाहिजा आवेदन भरकर पेश किया गया था, किन्तु उक्त दिनांक तक थाना कुम्हारी में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी । यदि मुलाहिजा रिपोर्ट थाना कुम्हारी द्वारा भरा गया है, तो यह मामले के दर्ज हाने से पहले ही मुलाहिजा करा लिये जाने की स्थिति को दर्शित करता है । यह भी उल्लेखनीय है कि चिकित्सा अधिकारी द्वारा मुलाहिजा रिपोर्ट दिनांक 16-03-2017 को प्रदान किया गया है, अर्थात् घटना के चौथे दिन मुलाहिजा रिपोर्ट तैयार किया गया है । मुलाहिजा रिपोर्ट के अनुसार आहत के बांये पैराईटल टेम्पोरल स्केल्प में स्वेलिंग था, जिसे चिकित्सा अधिकारी डॉ.राजीव साहू ने गम्भीर बताया है, किन्तु स्केल्प में स्वेलिंग के अलावा अन्य किसी प्रकार की गम्भीर अथवा घातक परिस्थिति सी.टी.स्केन में प्रकट नहीं हाती है तथा मात्र सूजन, जो किसी प्रकार से जटिल नहीं था, वह चोट धारा-320 भा.दं.संहिता के अधीन परिभाषित गम्भीर प्रकृति के चोट की परिभाषा में नहीं आता है । 
29- इसके अलावा आहत लगातार 20 दिनों तक तीव्र पीड़ा से पीड़ित रहा अथवा 20 दिनों तक उपचार के अधीन रहा, ऐसा भी साक्ष्य नहीं है, अतः उक्त परिस्थितियां में आहत का आयी चोट को गम्भीर प्रकृति की चोट होना, नहीं माना जा सकता है । यद्यपि चिकित्सक साक्षी ने आहत की चोट का गम्भीर कहा है, किन्तु जैसा कि न्याय दृष्टान्त हंसराज उर्फ हंसू शंकर गोंड ़ विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य, 2001(भाग-2) एम.पी.वीकली नाट्स, नोट नंबर 147 (सुप्रीम कोर्ट) में ठहराया गया है कि चिकित्सीय साक्ष्य केवल राय है, जिस पर निर्णय आधारित नहीं हो सकता है । अनिल राय विरुद्ध बिहार राज्य, 2001(7) एस.सी.सी. 318 में ठहराया गया है कि अभियोजन साक्षी के मौखिक कथन और चिकित्सक की राय, न्यायालय द्वारा जब विचार में ली जाती है, तो मौखिक साक्ष्य का अधिमान्यता दी जाती है । चिकित्सक की राय, सत्य से अधिक परिकल्पना आधारित हाती है । अतः उपराक्त परिस्थितियों में आहत को आयी चोट का गम्भीर प्रकृति की चोट होना प्रमाणित नहीं हुआ है । 
30- मामले में अभियाजन की कहानी के अनुरूप तथ्यों का किसी भी साक्षी ने समर्थित नहीं किया है । किसी भी साक्षी ने आरापीगण के द्वारा शराब पीने के लिये पैसे मांगने तथा आहत द्वारा पैसे नहीं देने पर मारपीट कर, उपहति कारित करने का कथन नहीं किया है, बल्कि न्यायालय में नयी परिस्थिति को प्रकट किया है कि आरोपीगण के द्वारा कॉलानी के सामने लोगों को गाली-गलौज कर ललकार रहे थे और अश्लील गालियां दे रहे थे । इस प्रकार अभियाजन के मामले से भिन्न परिस्थिति उत्पन्न होती है । किसी भी साक्षी ने यह स्पष्ट कथन नहीं किया है कि आरोपीगण ने किस प्रकार की अश्लील गालियां उच्चारित की, जो सुनने में बुरा लगा, साथ ही ऐसा भी साक्ष्य नहीं है कि आरोपीगण ने जान से मारने की धमकी दिया, जिससे वास्तव में भय कारित हुआ था । अतः विचारणीय बिंदु क्रमांक-2, 3 एवं 4 के सम्बंध में विधिक साक्ष्य का अभाव है । 
31- जहां तक आरापीगण के द्वारा घातक आयुध से सज्जित होकर बल एवं हिंसा का प्रयाग कर, बलवा कारित करने का प्रश्न है, इस बिंदु पर किसी भी साक्षी ने ऐसा कथन नहीं किया है कि आरोपीगण उक्त हॉकी स्टिक, डण्डा, बेल्ट आदि से लैस हाकर मौके पर आये थे और गाली-गलौज कर रहे थे, अतः आरापीगण के द्वारा सामान्य उद्देश्य के तहत् बलवा कारित करने के लिये सुसज्जित होने के सम्बंध में साक्ष्य नहीं है । अभियोजन के प्रकरण से ही यह प्रकट होता है कि शराब पीने के लिये ही पैसे की मांग की गई और नहीं देने पर गाली-गलौज कर, मारपीट किया गया, अर्थात् आहत से बलपूर्वक पैसे मांगने के लिये पूर्व की तैयारी के साथ आरोपीगण की मौके पर उपस्थिति साबित नहीं होती है । घटना दिनांक को होली का त्यौहार था, उस दिन लोगां का आपस में समूह बनाकर रहने मात्र से यह नहीं कहा जा सकता है कि वे किसी अवैध उद्देश्य के लिये एकत्र हुये थे, साथ ही यह तथ्य इसलिये भी विश्वसनीय नहीं है कि सभी आरापीगण के द्वारा यदि पहले से ही गाली-गलौज किया जा रहा था और साक्षी विनाद, जो कथित रूप से पहली मंजिल पर से खड़े होकर देख रहा था, वह विवाद होने के बाद भी अपने भाई का बचाने के लिये नहीं जाता है ।
32- इसी प्रकार साक्षी रविभूषण ने अपने साक्ष्य में यह स्पष्ट स्वीकार किया है कि उसके भाई अथवा माता-पिता या मोहल्ले के कोई लाग बीच-बचाव के लिये नहीं आये थे । यदि सभी आरोपीगण के द्वारा सामान्य उद्देश्य के तहत् आरोपी से हॉकी स्टिक, डण्डा एवं बेल्ट से मारपीट किया गया था तथा आहत बेहाश हो गया था, इसके बाद भी आहत के सिर में मात्र एक चोट की उपस्थिति, सभी आरोपीगण के द्वारा मारपीट करने की सम्भावना का समाप्त कर देती है और चूंकि मामले में यह स्पष्ट साक्ष्य नहीं है कि किस आरापी ने उक्त एकमात्र चोट कारित किया था । उक्त एक चोट के लिये सभी आरोपीगण को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि मामले में सामान्य उद्देश्य के तत्व प्रमाणित नहीं हुये हैं । 




33- मामले में अभियाजन के द्वारा प्रस्तुत उपराक्त साक्षियों के विवेचना से न्यायालय यह पाती है कि अभियोजन का मामला विश्वसनीय रूप से ठोस विधिक साक्ष्य से प्रमाणित नहीं है, अतः आरोपीगण के विरुद्ध विचाराधीन आरोपों का प्रमाणित करने में विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में आरापीगण की दाषसिद्धि नहीं ठहरायी जा सकती है । अतः आरोपीगण का भा.दं.संहिता की धारा-148, 294, 506(बी) एवं 329 सहपठित धारा-149 के आरापां से दोषमुक्त किया जाता है । 
34- अभियुक्तगण के जमानत व मुचलके, माननीय अपीलीय न्यायालय में अपील प्रस्तुत होने की स्थिति में उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु धारा 437(क) दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्रावधान के तहत् निर्णय दिनांक से आगामी 06 माह तक प्रभावशील रहेंगे। 
35- अभियुक्तगण पुरूषात्तम उर्फ छाटू यादव, मुकेश पटेल, ताराचंद पटेल, प्रताप पटेल एवं मुकेश साहू दिनांक 22-03-2017 से दिनांक 28-03-2017 तक (कुल 07 दिन), अभियुक्त सेतराम धु्रव उर्फ सेतु दिनांक 04-04-2017 से दिनांक 11-04-2017 तक (कुल 08 दिन) एवं अभियुक्त रोशन यादव दिनांक 29-05-2017 से दिनांक 31-05-2017 तक (कुल 03 दिन) अभिरक्षा में रहे हैं, अतः अभियुक्तगण के द्वारा बितायी गई अभिरक्षा अवधि के सम्बंध में धारा-428 दं.प्र.संहिता के तहत् प्रमाण-पत्र, निर्णय के साथ संलग्न किया जावे । 
36- प्रकरण में जप्तशुदा डण्डा, बेल्ट व हॉक स्टिक अपील अवधि पश्चात्, अपील न होने पर नष्ट किया जावे । अपील होने की दशा में माननीय अपीलीय न्यायालय के निर्देशानुसार सम्पत्तियों का निराकरण किया जावे ।
दुर्ग,                                                                                                                        सही/-

दिनांक : 30 मई, 2018                                                                               (अजीत कुमार राजभानू)
                                                                                                            प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश
                                                                                                                          दुर्ग (छ.ग.)

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