Saturday, 17 August 2019

Bail Case : दिलीप कुमार साहू विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन

B.A.No. 881/2019 (Cr.No.48/2019, Mahila Thana Durg)
न्यायालय: अजीत कुमार राजभानू, प्रथम अति. सत्र न्यायाधीश, दुर्ग (छ.ग.)
Court: Ajit Kumar Rajbhanu, First High. Sessions Judge, Durg (Chhattisgarh)
जमानत आवेदन Bail application क्रमांक-881/2019
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 दिलीप कुमार साहू आत्मज कृपाराम साहू उम्र 32 वर्ष, निवासी: इंदिरा चौक, संजय नगर, टिकरापारा, रायपुर, जिला रायपुर (छ.ग.)
।। विरुद्ध ।।
छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा: थाना प्रभारी महिला थाना दुर्ग (छ.ग.)
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07-08-2019 यह जमानत आवेदन माननीय सत्र न्यायाधीश Session judge के न्यायालय से अन्तरण पर प्राप्त।
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आवेदक/आरोपी दिलीप कुमार साहू Applicant / accused Dilip Kumar Sahu की ओर से श्री संतोष वर्मा, अधिवक्ता Shri Santosh Verma, Advocate उपस्थित ।
अनावेदक/राज्य Non-Applicant State द्वारा सुश्री फरिहा अमीन, अपर लोक अभियोजक Ms. Fariha Amin, Additional Public Prosecutor उपस्थित ।
1- आवेदक/आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत हेतु प्रस्तुत आवेदन-पत्र, अंतर्गत धारा-438 दण्ड प्रक्रिया संहिता Section-438 Code of Criminal Procedure पर सुना गया ।
2- संक्षेप में आवेदन-पत्र इस प्रकार है कि प्रार्थिया मंजूलता साहू Manjulata Sahu द्वारा की गई शिकायत के आधार पर महिला थाना, दुर्ग द्वारा आवेदक सहित उसके माता-पिता एवं बहनों के विरुद्ध भा.दं.संहिता की धारा-498/34 Section-498/34 of Indian Penal Code के तहत् अपराध पंजीबद्ध किये जाने की उसे जानकारी हुई है । आवेदक का विवाह प्रार्थिया मंजूलता साहू के साथ सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार ग्राम जेवरा-सिरसा, जिला दुर्ग में दिनांक 10-02-2017 को सम्पन्न हुआ था । विवाह के कुछ दिन बाद से ही प्रार्थिया अपने पति अर्थात् आवेदक को उसके माता-पिता से अलग रहने के लिये लगातार दबाव बनाती रही है, जिससे इन्कार करने पर विवाह के लगभग तीन माह बाद अपने पिता होरीलाल कों फोन करके बुलाकर जब आवेदक अपने कार्य से बाहर था, तब पति की बगैर सहमति एवं जानकारी के अपने पति का घर छोड़कर मायके चली गयी थी । आवेदक ने प्रार्थिया को ससम्मान अच्छे से रखने का कई प्रयास किया, किन्तु प्रार्थिया की हठधर्मिता के कारण ही दोनों एक साथ निवासरत नहीं हैं । आवेदक द्वारा प्रदेश साहू संघ, रायपुर Pradesh Sahu Sangh, Raipur में दिनांक 08-10-2018 को की गई शिकायत पर समाज के व्यक्तियों द्वारा प्रार्थिया को समझाईश देते हुये अपने पति के साथ रहने का सुझाव दिया गया था । प्रार्थिया द्वारा दिनांक 25-11- 2017 को पुत्री को जन्म देने के पश्चात् से ही लगातार आवेदक को उसके माता-पिता से अलग किराये के मकान में रहने हेतु दबाव बनाती रही और अपने इरादा में सफल नहीं हो सकी, तो उसने झूठी शिकायत की है । आवेदक एक शिक्षित एवं सामाजिक व्यक्ति है, समाज में उसकी काफी मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा है, उक्त अपराध में आवेदक को गिरफ्तार किये जाने की दशा में आवेदक का मान-सम्मान प्रभावित होगा । आवेदक, रायपुर जिले का मूल निवासी है, जमानत पर छूटने के पश्चात् अन्यत्र भागने अथवा फरार होने की सम्भावना नहीं है, न्यायालय द्वारा अधिरोपित सभी शर्तों का पालन करने के लिये तैयार है । प्रकरण के अन्य आरोपियों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा अग्रिम जमानत Anticipatory bail का लाभ प्रदान किया गया है, अतः आवेदक को भी अग्रिम जमानत पर छोड़ दिया जावे।
3- आवेदन-पत्र की कंडिका-11 में यह भी उल्लेख किया गया है कि अग्रिम जमानत हेतु यह प्रथम आवेदन-पत्र first application for anticipatory bail है, इसके अतिरिक्त अन्य कोई जमानत आवेदन-पत्र किसी सक्षम न्यायालय अथवा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष न तो लम्बित है और न ही निरस्त किया गया है । आवेदन के समर्थन में आवेदक द्वारा स्वयं का शपथ-पत्र Own affidavit प्रस्तुत किया गया है ।
4- राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है ।
5- आवेदक/आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत हेतु प्रस्तुत आवेदन-पत्र के परिप्रेक्ष्य में महिला थाना, दुर्ग के अपराध क्रमांक-48/2019, अंतर्गत धारा-498(ए)/34 भा.दं. संहिता, सहपठित धारा-4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम Section-4 Dowry Prohibition Act की पुलिस केस डायरी तथा आवेदकगण की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन किया गया ।
6- केस डायरी के अनुसार प्रार्थिया श्रीमती नम्रता उर्फ मंजूलता साहू द्वारा इस आशय का लिखित शिकायत Written complaint प्रस्तुत किया गया है कि दिलीप साहू के साथ उसका विवाह हिन्दू रीति -रिवाज के अनुसार दिनांक 01-02-2017 को सम्पन्न हुआ था। विवाह के उपरान्त उसके सास-ससुर द्वारा कहा गया कि उनका इकलौता बेटा है, शिक्षक होते हुये भी उनके सोचे अनुसार दहेज नहीं दिये । उसके पति की बहनें एक राय होकर मीटिंग करते और इसके पति को कहते थे कि तुम गलत जगह विवाह कर लिये हो, तुम्हारा बाप दहेज में गाड़ी नहीं दिया है । इसे टोनही Tonahi कहकर प्रताडि़त करते हैं और सास ने कोटनी के पांच तांत्रिक कों बुलाकर शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त किया है। उसके पति द्वारा कहा गया कि सभी ने इसे टोनही कहा है, इसलिये दाम्पत्य सम्बंधों Marriage relationship का निर्वहन नहीं कर सकता। दिनांक 25-11-2017 को पुत्री का जन्म हुआ, जिसमें डिलीवरी का सारा खर्च इसके पिता द्वारा उठाया गया । इसके सास, ससुर एवं ननद द्वारा कहा गया कि 5,00,000/-रुपये तथा कार कोई बड़ी चीज नहीं है, कार व नगद 5,00,000/-रुपये लाकर दो, तो तुम्हारी लड़की को साथ में रखेंगे, अन्यथा भूल जावो। अक्टूबर, 2018 में यह अपनी बच्ची तथा पिता, भाई, मामा एवं नाना सहित समाज के लोगों के साथ ससुराल गयी, तो इसकी सास ने घर के अन्दर ताला लगाकर प्रवेश देने से मना कर दी। उपरोक्तानुसार की गई रिपोर्ट के आधार पर आवेदकगण के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया जाकर अन्वेषण investigation किया जा रहा है।
7- विचार किया गया । केस डायरी के अनुसार प्रार्थिया द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट First Information Report दिनांक 10-07-2019 को काउंसिलिंग की कार्यवाही के उपरान्त दर्ज करायी गई है । काउंसिलिंग की रिपोर्ट आवेदकगण की ओर से संलग्न की गई है, जिसमें उभय-पक्षों के द्वारा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किये गये हैं । प्रार्थिया द्वारा दहेज एवं मानसिक प्रताड़ना की बात बतायी गई है, जबकि अनावेदक पति ने प्रार्थिया को सास-ससुर से अलग रहने के लिये दबाव डालने तथा इकलौता पुत्र होने से मॉ-बाप को छोड़ने में असमर्थता व्यक्त किया है तथा प्रार्थिया द्वारा भी सास-ससुर से दुर्व्यवहार करने की बात बताया है । मामले में, धारा-498 (ए) भा.दं.संहिता के तहत् अन्वेषण किया जा रहा है । वर्तमान मामले में अन्य आरोपीगण कृपाराम साहू Kriparam Sahu, जो आवेदक/आरोपी के पिता हैं, कौशिल्या साहू Kaushilya Sahu, जो आरोपी की माता है, लता साहू एवं शैलेन्द्री साहू Lata Sahu and Shailendri Sahu, जो आरोपी की बहनें हैं, को पूर्व में इस न्यायालय द्वारा जमानत याचिका क्रमांक 800/2019 में पारित आदेश दिनांक 23-07-2019 एवं जमानत याचिका क्रमांक 823/2019 में पारित आदेश दिनांक 26-07-2019 के अनुसार केस डायरी में उक्त आरोपीगण के विरुद्ध संकलित सामग्री के आधार पर अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किया गया है।

8- किन्तु वर्तमान आवेदक/आरोपी दिलीप कुमार, प्रार्थिया का पति है तथा पत्नी के प्रति पति का, अन्य रिश्तेदारों की अपेक्षा अधिक जिम्मेदारी रहती है कि वह अपनी पत्नी के प्रति उचित व्यवहार करे तथा वर्तमान मामले में आवेदक/आरोपी पति के विरुद्ध प्रार्थिया को प्रताड़ित करने के सम्बंध में जो सामग्री उपलब्ध है, वह अन्य आरोपीगण की अपेक्षा गम्भीर है तथा अन्य आरोपीगण को अग्रिम जमानत का लाभ प्राप्त होने के आधार पर आवेदक/आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान किये जाने हेतु समरूप मामला प्रकट नहीं होता है । अतः आवेदक/आरोपी दिलीप कुमार साहू, जो प्रार्थिया का पति है, के विरुद्ध संकलित साक्ष्य को देखते हुये उसे अग्रिम जमानत Anticipatory bail का लाभ प्रदान किये जाने हेतु उचित मामला निर्मित नहीं होता है, अतः आवेदक/आरोपी दिलीप कुमार साहू की ओर से अग्रिम जमानत हेतु प्रस्तुत आवेदन, अंतर्गत धारा-438 दं.प्र.संहिता, निरस्त किया जाता है ।

9- आदेश की प्रति के साथ पुलिस केस डायरी वापस हो तथा आदेश की एक प्रति, प्रकरण के विचारण का क्षेत्राधिकार रखने वाले सम्बंधित न्यायालय को सूचनार्थ प्रेषित किया जावे ।
10- जमानत प्रकरण का परिणाम दर्ज कर प्रकरण अभिलेखागार भेजा जावे ।
सही/-
(अजीत कुमार राजभानू)
प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश
दुर्ग (छ.ग.)

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