Saturday, 30 March 2019

इंदरमन साहू विरूद्ध होमलाल वगैरह

 

व्य.प्र.सं. के आदेश 7 नियम 3 के अनुसार, वाद की विषय वस्तु अर्थात वादग्रस्त भूमि के स्थावर संपत्ति होने के बावजूद वादपत्र के साथ वादग्रस्त भूमि का सामान्य नक्शा व चर्तुसीमा संलग्न नहीं होने की स्थिति में एवं कथित आधिपत्य की भूमि से वादग्रस्त भूमि से दूरी और स्थिति की जानकारी स्पष्ट नहीं होने, कितने क्षेत्रफल पर निर्माण है यह स्‍पष्‍ट नहीं होने, कितने क्षेत्रफल की भूमि का किस रूप में उपयोग किया जा रहा है उसकी जानकारी नहीं होने, ना ही वादी द्वारा उत्तम साक्ष्य प्रस्तुत किये जाने के कारण स्थितियां अभिलेख पर स्पष्ट नहीं हो पाती है।
वादग्रस्त भूमि के किस व कितने भाग में प्रतिवादीगण के द्वारा हस्‍तक्षेप किया जा रहा है इस संबंध में भी दस्तावेजी साक्ष्य अनुपलब्ध होने, हस्‍तक्षेप का प्रयास कब व कैसे किया गया इसकी जानकारी भी नहीं होने, कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने से प्रतिवादी का हस्‍तक्षेप स्‍वमेव प्रमाणित नहीं होता। पूरा निर्णय पढ़ें ...




न्यायालय:-सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग -2 दुर्ग,
जिला-दुर्ग (छ.ग.)
(पीठासीन अधिकारी-कु.स्मिता रत्नावत)
व्यवहार वाद क्रः-02-ए/12
संस्थित दिनाँकः-04.04.12
इंदरमन साहू, पिता श्री जगदीश साहू,
उम्र 55 वर्ष, साकिन- बोरीगारका,
थाना-उतई, तहसील व जिला दुर्ग,(छ.ग.)                      .................वादी
//विरूद्ध//
1(क)-होमलाल, पिता श्री धर्मदास, उम्र 35 वर्ष,
1(ख)-श्रीमती जानकी, पति स्व.धर्मदास, उम्र 60 वर्ष,
दोनों निवासी- बोरीगारका, बोरीगारका,
थाना उतई, तहसील व जिला दुर्ग (छ.ग.)
2- बंशीधर, पिता श्री धर्मदास सतनामी, उम्र 45 वर्ष,
3- नंदकिशोर उर्फ जुगुन, पिता श्री शंकरलाल सतनामी, उम्र 25 वर्ष
4- शिवकुमार, पिता श्री धर्मदास सतनामी, उम्र 42 वर्ष,
5- कुलेश्वर, पिता श्री हृदयराम सतनामी, उम्र 39 वर्ष,
सभी निवासी-ग्राम बोरीडीह, वार्ड बोरीगारका,
थाना उतई, तहसील व जिला दुर्ग (छ.ग.)
6- छ.ग.शासन,
द्वारा कलेक्टर, दुर्ग,(छ.ग.)                                 ...............प्रतिवादीगण
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वादी द्वारा श्रीमती रेवा खरे अधिवक्ता।
प्रतिवादी क्रमांक 1 से 5 द्वारा श्री दिलीप सुखदेव अधिवक्ता।
प्रतिवादी क्रमांक 6 एक पक्षीय (दिनांक 18.05.12)
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//निर्णय//
(आज दिनांक 04.08.2014 को घोषित)
1/ वादी द्वारा यह वाद, वादग्रस्त संपत्ति- खसरा नंबर 616/3 रकबा 0.12 हेक्टेयर, खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर, वार्ड-बोरीडीह,ग्राम पुरई बोरीगारका, तहसील व जिला दुर्ग के संबंध में स्वामित्व घोषणा, स्थायी निषेधाज्ञा व नुकसानी स्वरूप 1,00,000/- (एक लाख रू.) प्राप्ति हेतु प्रतिवादीगण के विरूद्ध संस्थित किया गया है।
2/ वाद में उभयपक्ष के मध्य यह स्वीकृत तथ्य है कि-
3/ वादी का वाद संक्षेप में इस प्रकार है, कि-
वादी के हक एवं आधिपत्य की खसरा नंबर 616/3 रकबा 0.12 पर मकान व खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर पर दुकान निर्मित कर, शेष भूमि का उपयोग वादी द्वारा बाड़ी के रूप में किया जा रहा है। वादी की भूमि खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर से लगी हुई खसरा नंबर 16/2 की शासकीय घास भूमि स्थित है। प्रतिवादीगण द्वारा उक्त शासकीय घास भूमि पर अवैधानिक आधिपत्य कर मकान निर्मित किया गया है। प्रतिवादीगण द्वारा अपने मकान में आने जाने के लिए वादी के स्वामित्व के खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर का उपयोग किया जा रहा है। प्रतिवादीगण द्वारा खसरा नंबर 16/2 की घासभूमि पर अवैधानिक रूप से आधिपत्य कर मकान निर्मित कर, अपने व रहवासियों के आने जाने के रास्ते पर घेरा लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया है। प्रतिवादीगण द्वारा अपने मकान में आने जाने के लिए वादी के स्वामित्व खसरा नंबर 616/5 को अवैधानिक तरीके से उपयोग मे लाने हेतु पत्थर आदि रखकर दखल उत्पन्न कर हस्तक्षेप किया जा रहा है।




4/ पूर्व में शासकीय घास भूमि खसरा नंबर 16/2 पर रमाकांत गुप्ता नामक व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जा किये जाने पर ग्राम पंचायत बोरीगारका द्वारा कब्जा हटाने की कार्यवाही करते हुए, सीमेंटर्, इंट व छड़ को जप्त किया गया था। रमाकांत गुप्ता द्वारा वादी एवं ग्राम बोरीडीह के रहवासियों के घर के पानी निकासी हेतु निर्मित नाली को बंद करने पर, रमाकांत गुप्ता के विरूद्ध द.प्र.सं. की धारा 133 के तहत् कार्यवाही करते हुए अनुविभागीय दण्डाधिकारी दुर्ग द्वारा दिनांक 31.01.11 को तत्काल अवरोध हटाये जाने का आदेश पारित किया था। इसके बावजूद भी प्रतिवादीगण शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर अवैधानिक तरीके से मकान निर्मित कर वादी की भूमि पर हस्तक्षेप करते हुए वादी को परेशान करते आ रहे है। प्रतिवादीगण, वादी के स्वामित्व की भूमि खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर को हड़पने की नियत से खसरा नंबर 16/2 पर निर्माण कार्य कर, वादी के स्वामित्व की खसरा नंबर 616/5 की भूमि पर आने जाने के लिए रास्ता निर्मित कर उपयोग करना चाहते है। इसके विपरीत वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि को स्व-अर्जित आय से वर्ष 1991 में क्रय
कर स्वामित्व व आधिपत्य प्राप्त किया गया है। प्रतिवादीगण द्वारा वादी की बाड़ी में अवैधानिक तरीके से हस्तक्षेप किये जाने के कारण वादी वादग्रस्त भूमि के उपयोग से वंचित हो गया है। फलस्वरूप वादी को प्रतिवर्ष 10 हजार रू. का नुकसान हो रहा है। प्रतिवादीगण द्वारा वादग्रस्त भूमि को हड़पने की नियत से वादी के आधिपत्य में हस्तक्षेप से वादकारण निरंतर जारी है। प्रतिवादी क्रमांक 4 को प्रकरण में औपचारिक पक्षकार बनाया गया है। वादग्रस्त भूमि सीलिंग से प्रभावित भूमि में नही है। वादी द्वारा वादग्रस्त संपत्ति के संबंध में स्वत्व घोषणा,स्थायी निषेधाज्ञा व नुकसानी हेतु क्रमशः 1000/-रू., 1000/-रू. व 1,00,000/-रू. नुकसानी हेतु 10,000/-रू., कुल 12,000/-रू. वाद मूल्यांकन कर, कुल 1240/-रू. का न्याय शुल्क चस्पा किया है।




5/ प्रतिवादी क्रमांक 1 से 5 द्वारा वादी के उपरोक्त सभी अभिवचनों को अस्वीकार करते हुए अभिकथन किया है कि-
प्रतिवादीगण द्वारा खसरा नंबर 16/2 रकबा 2), 5 डिसमिल एवं खसरा नंबर 277 रकबा 5 डिसमिल, प.ह.नं. 31, रा.नि.मं. अण्डा, ग्राम बोरीगारका, तहसील व जिला दुर्ग (छ.ग.) स्थित भूमि की दिनांक 01.11.10 को क्रय किया गया था। ग्राम पंचायत बोरीगारका द्वारा उक्त भूमि का पट्टा सुदामा राम व गोकुल कुमार पिता श्री लूमचंद गजपाल, सोहागा बाई पति श्री लूमचंद गजपाल को दिनांक 30.06.99 को प्रदान किया गया था। वादी एवं प्रतिवादीगण अपनी-अपनी भूमि के आधिपत्य में है। प्रतिवादीगण वादी के स्वामित्व की भूमि पर अवैध रूप से आधिपत्य कर, हड़पने की नियत नहीं रखते है। प्रतिवादीगण के मकान के सामने स्थित भूमि शासकीय घास भूमि होकर तालाब जाने के रास्ते की भूमि है। उक्त भूमि से बरसात का पानी तालाब व अन्य खार की तरफ जाता हैं। उक्त भूमि ग्रामवासियों के आने-जाने व वादी के घर से मुख्य सड़क (दुर्ग से पाऊवारा जाने वाला मार्ग) में आने-जाने का रास्ता है। वादी द्वारा उक्त भूमि को खंभा गाड़कर कटीले तार से रोका गया है। वादी द्वारा उक्त भूमि को अपनी बताकर प्रतिवादीगण से वाद-विवाद किया जाता है। वादी द्वारा जिस भूमि को वादग्रस्त अपने आधिपत्य की भूमि को बताया जा रहा है, उस भूमि के संबंध में राजस्व निरीक्षक व पटवारी का सीमांकन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है।
6/ उभयपक्ष के अभिवचनों के आधार पर पूर्व पीठासीन अधिकारी द्वारा निम्नलिखित वादप्रश्‍न दिनांक 12.10.12 को विरचित किये जाने पर समक्ष निष्कर्ष लेखबद्ध किये गये :-




वादप्रश्‍न निष्कर्ष
1. क्या वादी प्रतिवादी के विरूद्ध ग्राम पुरई,प.ह.नं. तहसील व जिला दुर्ग भूमि खसरा नंबर 616/3, 616/5 रकबा 0.12 व 0.03 हेक्टे. का भूमि स्वामी होने एवं उस पर किसी का दखल व अधिकार न होने संबंधी घोषण प्राप्त करने का अधिकारी है ? .... स्वामी होना प्रमाणित।
2. क्या वादी प्रतिवादीगण से वादग्रस्त भूमि पर 10,000/-रू0 प्रतिवर्ष की दर से 1 वर्ष की नुकसानी प्राप्त करने का अधिकारी है ? ... नहीं।
3. क्या वादी प्रतिवादीगण के विरूद्ध वादग्रस्त भूमि पर प्रतिवादीगण द्वारा या अन्य के माध्यम से हस्तक्षेप किये जाने हेतु स्‍थाई निषेधाज्ञा प्राप्त करने का अधिकारी है ? ... नहीं।
4. सहायता एवं व्यय?   ... निर्णय कंडिका 16 अनुसार।
//निष्कर्ष के आधार//
वाद प्रश्‍न क्रमांक:-1:-
7/ इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने अपने मुख्य परीक्षण में अभिसाक्ष्य दिया है कि, वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि को वर्ष 1991 में क्रय कर मकान व दुकान निर्मित कर निवास कर, शेष भूमि को बाड़ी के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने अपने मुख्य परीक्षण की कंडिका 2 में, वादग्रस्त भूमि को क्रय करने के पश्चात् वादग्रस्त भूमि के राजस्व अभिलेख में स्वयं का नाम भूमि स्वामी के रूप में दर्ज होना व्यक्त किया हैं। अग्राहिज (वा.सा.1), पतिराम (वा.सा.3) व चंपेश्वर गजपाल (वा.सा.5) ने अपने मुख्य परीक्षण में, वादी की उक्त साक्ष्य का समर्थन किया हैं। नंदकिशोर मांडले (प्र.सा.1) ने अपने मुख्य परीक्षण की कंडिका 1 में, वादग्रस्त भूमि को वादी के स्वामित्व एवं आधिपत्य की भूमि होना व्यक्त करते हुए, वादग्रस्त भूमि से लगी हुई खसरा नंबर 16/2 रकबा 5 डिसमिल एवं खसरा नंबर 277 रकबा 5 डिसमिल की भूमि प.ह.नं. 31, तहसील व जिला दुर्ग में स्थित होना व्यक्त किया है। नंदकिशोर मांडले (प्र.सा.1) ने अपने मुख्य परीक्षण की कंडिका 2 में, खसरा नंबर 16/2 रकबा 5 डिसमिल एवं खसरा नंबर 277 रकबा 5 डिसमिल की भूमि प.ह.नं. 31, तहसील व जिला दुर्ग को रमाकांत गुप्ता नामक व्यक्ति से दिनांक 01.11.10 को क्रय करना व्यक्त किया है। नंदकिशोर मांडले (प्र.सा.1) ने अपने मुख्य परीक्षण में, खसरा नंबर 16/2 व खसरा नंबर 277 की भूमि को रमाकांत गुप्ता द्वारा सुदामा राम, गोकुल कुमार व सोहागा बाई को दिनांक 03.06.99 को उक्त भूमि ग्राम पंचायत बोरीगारका द्वारा पट्टे पर प्रदान किये जाने की साक्ष्य प्रकट की है। इंदरमन साहू (वा.सा.2) द्वारा अपने मुख्य परीक्षण में, खसरा नंबर 16/2 की भूमि को शासकीय घास भूमि होना व्यक्त करते हुए, वादग्रस्त भूमि के खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर से लगी हुई होना व्यक्त किया है। वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि, बोधनसिंह राजपूत से क्रय किये जाने के संबंध में, पंजीकृत विक्रय विलेख दिनांकित 27.09.91 (प्र.पी.1) प्रस्तुत किया गया है। विक्रय विलेख दिनांकित 27.09.91 (प्र.पी.1) में विक्रय विलेख के गवाह अग्राहिज(वा.सा.1) व सुखराम साहू (प्र.सा.3) है। यद्यपि अग्राहिज(वा.सा.1) ने अपने मुख्य परीक्षण में, वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि क्रय किये जाने के संबंध में कोई साक्ष्य प्रकट नही की है। इसके विपरीत सुखराम साहू (प्र.सा.3) ने अपने प्रतिपरीक्षण में, विक्रय विलेख दिनांकित 27.09.91 (प्र.पी.1) पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार कर, वादी द्वारा क्रय की गयी भूमि की पहचान ज्ञात नहीं होना व्यक्त किया हैं।




8/ इसके विपरीत प्रतिवादीगण द्वारा, वादी द्वारा क्रय की गयी वादग्रस्त भूमि के अभिवचन को विवादित भी नहीं किया गया हैं। वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि के संबंध में विक्रेता बोधनसिंह का नाम खसरा नंबर 616 की भूमि पर दर्ज होने के संबंध में खसरा पांचसाला वर्ष 1988-89 (प्र.पी.6) प्रस्तुत किया है। खसरा पांचसाला वर्ष 1988-89 (प्र.पी.6) के कॉलम नंबर 18 में, वादग्रस्त भूमि के खसरा नंबर 616/3 व 616/5 की भूमि पर वादी का नाम दर्ज होने की टीप अंकित है। इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने वर्ष 2012-13 का खसरा पांचसाला की प्रति (प्र.पी.8-सी) प्रस्तुत की है। वादग्रस्त भूमि के खसरा पांचसाला वर्ष 2012-13 (प्र.पी.8-सी) में वादग्रस्त भूमि पर, वादी इंदरमन साहू का नाम दर्ज है। प्रतिवादी द्वारा वादग्रस्त भूमि वादी की स्वामित्व की न होने के संबंध में कोई अभिवचन व साक्ष्य प्रकट नहीं की है। अतः वादी इंदरमन साहू (वा.सा.2) वादग्रस्त भूमि के स्वामी होना प्रमाणित पाये जाता है।
वादप्रश्‍न क्रमांक 3:-
9/ वादी के समग्र अभिवचनों के परिशीलन पश्चात् यह दर्शित होता है कि, वादी द्वारा अपने वादपत्र में कुल 3 बिंदूओं के आधार पर वादग्रस्त भूमि में प्रतिवादीगण द्वारा हस्तक्षेप किया जाना प्रकट किया है। अभिवचनित 3 बिंदूओं में-
(1) प्रतिवादीगण खसरा नंबर 16/2 की भूमि पर मकान निर्मित कर, अपने मकान में आने-जाने के लिए वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर का उपयोग प्रारंभ कर,
(2) स्वयं प्रतिवादी व अन्य रहवासियों के आवागमन के रास्ते पर घेरा लगाकर, रहवासियों का रास्ता बंद कर,
(3) वादग्रस्त भूमि के खसरा नंबर 616/5 को अवैधानिक तरीके से उपयोग में लाने हेतु पत्थर आदि रखकर, वादग्रस्त भूमि पर वादी के आवागमन में अवरोध उत्पन्न कर वादग्रस्त भूमि पर रास्ता निर्मित करना चाहते है।
इंदरमन साहू (वा.सा.2), अग्राहिज (वा.सा.1), पतिराम (वा.सा.3) व चंपेश्वर गजपाल (वा.सा.5) ने अपने मुख्य परीक्षण में, वादी के उक्त अभिवचनों (3बिंदू) का समर्थन किया है। समस्त वादी साक्षीगणों द्वारा अपने प्रतिपरीक्षण में, प्रतिरक्षा पक्ष द्वारा सुझाव दिये जाने पर, साक्ष्य स्वरूप/स्वतः कथन कर, यह तथ्य प्रकट किया है कि, वादग्रस्त भूमि व मुख्य मार्ग के मध्य लकड़ी के खंभे गाड़कर तार का घेरा डला हुआ है। अग्राहिज (वा.सा.1) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 13 व 14 में यह तथ्य स्वीकार किया है कि, प्रतिवादीगण के विक्रेता रमाकांत गुप्ता द्वारा प्रतिवादीगण के मकान में निवास करने के समय वादग्रस्त भूमि पर कोई घेरा डला हुआ नही था व प्रतिवादीगण द्वारा वादग्रस्त भूमि से लगी हुई भूमि पर स्थित मकान क्रय करने के पश्चात्, वादी द्वारा सड़क व मकान के मध्य की वादग्रस्त भूमि पर लकड़ी गाड़कर तार घेरा डाला है। वादी द्वारा प्रतिवादी साक्षियों को प्रतिपरीक्षण करते समय यह सुझाव दिया है कि, वादी द्वारा अपने घर के सामने की स्वयं के स्वामित्व की भूमि पर तार घेरा लगाया हुआ है। नंदकिशोर मांडले (प्र.सा.1) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 11 में, वादी के उक्त सुझाव से इंकार करते हुए, स्वतः कथन कर, तार घेरा लगी हुई भूमि, वादी के स्वामित्व की होने से अनभिज्ञता व्यक्त की है। शिवकुमार जांगडे (प्र.सा.2) व सुखराम साहू (प्र.सा.3) द्वारा अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 8 व 15 में, वादी के उक्त सुझाव से स्पष्टतः इंकार करते हुए, स्वतः कथन कर, वादी द्वारा लगाये जा रहे तार घेरे को लगाने से रोकने व न लगाने देने की साक्ष्य प्रकट की है। वादी व प्रतिवादी साक्षीगणों के प्रतिपरीक्षण में प्रकट उक्त साक्ष्य से स्पष्ट है कि, वादी यह कहना चाहते है कि, वादी द्वारा स्वयं वादग्रस्त भूमि को तार लगाकर घेरा गया था। इसके विपरीत वादी द्वारा अपने अभिवचनों में यह कहीं भी उल्लेखित नहीं किया है कि, स्‍वयं वादी द्वारा वादग्रस्त भूमि पर किसी प्रकार के लकड़ी के खंभे गाड़कर तार घेरा डाला गया है।




10/ पटवारी कमलेश साहू (वा.सा.4) ने अपने मुख्य परीक्षण की कंडिका 6 में, पटवारी नक्शा (प्र.पी.3) में, वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 616/5 के ऊपर रोड दर्शित होना व्यक्त कर, रोड से लगी हुई खसरा नंबर 616/5 की भूमि के तरफ कोई घास जमीन नही होने का तथ्य स्वीकार किया है। पटवारी कमलेश साहू (वा.सा.4) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 10 में, साक्ष्य हेतु न्यायालय में उपस्थित होने के पूर्व वादग्रस्त भूमि को देखने का तथ्य स्वीकार किया है। पटवारी कमलेश साहू (वा.सा.4) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 16 व 19 में, वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 616/5 पर कोई घेरा डला हुआ नही होना व वादग्रस्त भूमि खुली होने के कारण आमजन द्वारा वादग्रस्त भूमि से आना-जाना करने का तथ्य स्वीकार किया है। अभिलेख पर वादी के वादग्रस्त भूमि पर तार घेरा लगा होने का कोई अभिवचन नही है। इसके विपरीत वादी इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 36 व 39 में, प्रतिवादी द्वारा, वादग्रस्त भूमि पर वादी द्वारा बनवाये गये घेरे को हटाये जाने की साक्ष्य प्रकट की है। जब पटवारी कमलेश साहू (वा.सा.4) की प्रतिपरीक्षण में, वादग्रस्त भूमि के स्थान पर तार घेरा नही होने की साक्ष्य अभिलेख पर है, ऐसी दशा में वादी व वादी साक्षीगणों की वादग्रस्त भूमि पर लकड़ी का खंभा गाड़कर तार घेरा लगाये जाने की साक्ष्य संदेहास्पद हो जाती है। यदि वादी द्वारा, वादग्रस्त भूमि पर लकड़ी का खंभा गाड़कर तार घेरा लगाया गया था, तो-
क्यों वादी ने उक्त कृत्य को अपने अभिवचनों में स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं किया ?
अतः यह स्पष्ट है कि वादी स्वच्छ हाथों से न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए है।
11/ इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 27 व 29 में, स्‍वयं के मकान के सामने व रोड के पहले कुल दूरी 20 मीटर होना व्यक्त करते हुए, 20 मीटर की भूमि स्‍वयं के स्वामित्व की होना व शासन द्वारा उक्त 20 मीटर की भूमि पर नर्सरी बनाये जाने का तथ्य स्वीकार किया है। शिवकुमार जांगडे (प्र.सा.2) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 10 व 11 में, वादी के मकान के सामने की जिस जमीन पर, वादी को तार घेरा लगाने से रोका गया, उस जमीन से स्‍वयं द्वारा आना-जाना स्वीकार कर, मकान के पश्चात् वादी की बाड़ी व नर्सरी, नर्सरी से रोड लगा हुआ होना व्यक्त किया है। उभयपक्ष की उक्त साक्ष्य से यह दर्शित है कि, वादग्रस्त भूमि पर स्थित वादी के मकान के सामने रोड की तरफ रिक्त भूमि है, जिस पर नर्सरी बनी हुई हैं। वादी द्वारा अपने स्वामित्व की भूमि पर शासन को नर्सरी बनाने देने की अनुज्ञा क्यों व किस कारण से दी? इस संबंध में स्‍वयं वादी द्वारा कोई स्पष्टीकरण प्रकट नहीं किया गया है। शिवकुमार जांगडे (प्र.सा.2) भी, अपने प्रतिपरीक्षण में उक्त भूमि से आना-जाना स्वीकार करते है। इसके विपरीत स्‍वयं वादी साक्षी पटवारी कमलेश साहू (वा.सा.4) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 19 में, वादग्रस्त भूमि से आमजन का आना-जाना स्वीकार किया है। जब रोड व वादग्रस्त भूमि पर स्थित मकान के मध्य स्थित रिक्त भूमि पर प्रतिवादीगण व आमजन आवागमन कर रहे है तो, क्यों वादी द्वारा मात्र प्रतिवादीगण के विरूद्ध यह वाद संस्थित किया गया है? संस्थित वाद में आमजन पक्षकार नही हैं?




12/ नंदकिशोर मांडले (प्र.सा.1) ने अपने अभिवचनों का समर्थन करते हुए, प्रतिपरीक्षण की कंडिका 4 में, यह व्यक्त किया है कि, वादग्रस्त भूमि पर से बारिश का पानी तालाब में जाता है व स्‍वयं अनुविभागीय अधिकारी दुर्ग द्वारा थाना प्रभारी उतई के प्रतिवेदन के अनुसार वादग्रस्त भूमि पर तालाब जाने व पानी के बहाव वाली नाली में पोंगा डालकर मिट्टी डालने का निर्देश दिया है। इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 31 में, यह तथ्य स्वीकार किया है कि, वादी के घर व जमीन से होते हुए बारिश का पानी प्रतिवादीगण के मकान के पश्चिम दिशा में स्थित तालाब में जाता है। अग्राहिज (वा.सा.1) ने अपने प्रतिपरीक्षण की कंडिका 15 में, उक्त तथ्य स्वीकार किया है। उक्त साक्ष्य के परिप्रेक्ष्य में अनुविभागीय अधिकारी दुर्ग द्वारा दिनांक 31.03.11 को दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 719/10, इंदरमन विरूद्ध रमाकांत गुप्ता में पारित आदेश की प्रमाणित प्रस्तुत की है। रमाकांत गुप्ता प्रतिवादीगण की भूमि के पूर्व आधिपत्यधारी थे। आदेश दिनांकित 31.03.11 की प्रमाणित प्रति (प्र.पी.7) की अंतिम कंडिका में, अनावेदक रमाकांत द्वारा जानबूझकर, आम रास्ते पर से सार्वजनिक जल निकासी को अवरोध किये जाने का तथ्य उल्लेखित करते हुए, अनावेदक अर्थात रमाकांत गुप्ता को अवरोध हटाये जाने हेतु आदेश दिया है। यद्यपि प्रतिवादीगण की भूमि के पूर्व आधिपत्यधारी के विरूद्ध उक्त आदेश है, इसके विपरीत आदेश की अंतिम कंडिका में-‘‘आम रास्ते पर अवरोध’’ का तथ्य उल्लेखित है। अतः यह संदेहास्पद है कि, जिस जमीन से जल की निकासी हो रही है, वह वादी की जमीन है या आम रास्ता?
13/ इंदरमन साहू (वा.सा.2) ने अपने मुख्य परीक्षण की कंडिका 2 में, प्रतिवादीगण द्वारा वादग्रस्त भूमि के खसरा नंबर 616/5 को अवैधानिक तरीके से उपयोग में लाने हेतु पत्थर आदि रखकर, वादग्रस्त भूमि पर वादी के आवागमन में अवरोध उत्पन्न करने की साक्ष्य प्रकट की है। अग्राहिज (वा.सा.1), पतिराम (वा.सा.3) व चंपेश्वर गजपाल (वा.सा.5) ने वादी की उक्त साक्ष्य का समर्थन किया है। इसके विपरीत अभिलेख पर प्रतिवादीगण द्वारा वादग्रस्त भूमि पर पत्थर रखकर आवागमन करने के संबंध में कोई प्राथमिक साक्ष्य उपलब्ध नही है। वादग्रस्त भूमि के कितने क्षेत्रफल पर प्रतिवादीगण द्वारा कथित पत्थर रखकर, वादी के आवागमन को अवरूद्ध किया है, यह अभिलेखीय साक्ष्य से दर्शित नही है। वादग्रस्त भूमि पर प्रतिवादीगण द्वारा पत्थर रखने की मुख्य परीक्षण की साक्ष्य किसी अन्य साक्ष्य से समर्थित नही है।




14/ वादी द्वारा व्य.प्र.सं. के आदेश 7 नियम 3 के अनुसार, वाद की विषय वस्तु अर्थात वादग्रस्त भूमि स्थावर संपत्ति होने के बावजूद वादपत्र के साथ वादग्रस्त भूमि का सामान्य नक्शा व चर्तुसीमा तक संलग्न नहीं की है। यद्यपि वादग्रस्त भूमि का खसरा नंबर स्पष्ट रूप से वादपत्र में अभिवचनित किया गया है। इसके विपरीत मौके पर प्रतिवादीगण के कथित आधिपत्य की भूमि खसरा नंबर 16/2 व 277 की भूमि, वादग्रस्त भूमि से कितनी दूर किस दिशा में स्थित है?, यह भी अभिलेख पर स्पष्ट नहीं है। वादग्रस्त भूमि खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर के कितने क्षेत्रफल पर मकान/दुकान बनी है? कितने क्षेत्रफल की भूमि वादी द्वारा कथित बाड़ी के रूप में उपयोग में की जा रही है? वादग्रस्त भूमि के कितने क्षेत्रफल पर कथित नर्सरी संरचित है? यह वादी द्वारा उत्तम साक्ष्य प्रस्तुत न किये जाने के कारण अभिलेख पर स्पष्ट नहीं हो सका है। वादग्रस्त भूमि के किस व कितने भाग से प्रतिवादीगण आवागमन कर रहे है? इस संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य अनुपलब्ध है। वादी द्वारा निर्मित करवाया गया कथित तार घेरा को कितना व कब तोड़ा गया, इस संबंध मे भी कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है।
अतः प्रतिवादीगण द्वारा वादी के स्वामित्व की वादग्रस्त भूमि में हस्तक्षेप किया जाना अप्रमाणित पाया जाता है।
वाद प्रश्‍न क्रमांक 2:-
15/ वादप्रश्न क्रमांक 1 की साक्ष्य विवेचना से, वादी का वादग्रस्त भूमि का स्वामी होना प्रमाणित पाया गया है। वादप्रश्न क्रमांक 3 की साक्ष्य विवेचना से, प्रतिवादीगण द्वारा वादी के स्वामित्व की वादग्रस्त भूमि में हस्तक्षेप किया जाना अप्रमाणित पाया गया है। अतः वादी को वादग्रस्त भूमि के संबंध में 10 हजार रू. प्रतिवर्ष की दर से क्षति होना दर्शित नहीं होता है।
अतः वादी, प्रतिवादीगण 10 हजार रू. प्रतिवर्ष की दर से 1 वर्ष की नुकसानी प्राप्त करने के अधिकारी नही है।
वाद प्रश्‍न क्रमांक 4 :-
16/ अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के आलोक में वादप्रश्न क्रमांक 1,2 व 3 के संबंध में साक्ष्य विवेचना के आधार पर संस्थित व्यवहार वाद आंशिक रूप से स्वीकार कर वाद में निम्नलिखित आशय की डिक्री पारित की जाती है -
1- वादी, वादग्रस्त संपत्ति-‘‘खसरा नंबर 616/3 रकबा 0.12 हेक्टेयर, खसरा नंबर 616/5 रकबा 0.03 हेक्टेयर, वार्ड- बोरीडीह, ग्राम पुरई बोरीगारका, तहसील व जिला दुर्ग’’ के स्वामी है।
उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्‍वयं वहन करेंगे।
अधिवक्ता शुल्क नियमानुसार देय हो।
निर्णय आज दिनांकित, हस्ताक्षरित कर घोषित किया गया।
(कु.स्मिता रत्नावत)
सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2,
दुर्ग(छ.ग.)
मेरे निर्देशन पर टंकित।
(कु.स्मिता रत्नावत)
सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2, दुर्ग(छ.ग.)




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