Tuesday, 25 October 2016

जनहित याचिका

 

जनहित याचिका क्या है ?
जनहित याचिका वह याचिका है, जो कि उन (लोगों) के सामूहिक हितों के लिए न्यायालय में दायर की जाती है। कोई भी व्यक्ति जनहित में या फिर सार्वजनिक महत्व के किसी मामले के विरूद्ध, जिसमें किसी वर्ग या समुदाय के हित अथवा उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हों, जनहित याचिका के जरिए न्यायालय की शरण ले सकता है।
जनहित याचिका किस न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है:-
1 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के समक्ष।
2 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के समक्ष।
जनहित याचिका कब दायर की जा सकती है ?
जनहित याचिका दायर करने के लिए यह जरूरी है कि लोगों के सामूहिक हितों जैसे सरकार के कोई फैसले या योजना जिसका बुरा असर लोगों पर पड़ा हो। किसी एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होने पर भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है।
जनहित याचिका कौन व्यक्ति दायर कर सकता है ?
कोई भाी व्यक्ति जो सामाजिक हितों के बारे में सोच रखता हो, वह जनहित याचिका दायर कर सकता है। इसके लिए यह जरूरी नहीं कि उसका व्यक्तिगत हित भी सम्मिलित हो।
जनहित याचिका किसके विरूद्ध दायर की जा सकती है ?
जनहित याचिका केंद्र सरकार, राज्य सरकार, नगर पालिका परिशद् और किसी भी सरकारी विभाग के विरूद्ध दायर की जा सकती है। यह याचिका किसी निजी पक्ष के विरूद्ध दायर नहीं की जा सकती। लेकिन अगर किसी निजी पक्ष या कंपनी के कारण जनहितों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो, तो उस पक्ष या कंपनी को सरकार के साथ प्रतिवादी के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए बिलासपुर में स्थित किसी निजी कारखाने से वातावरण प्रदूषित हो रहा है, तब जनहित याचिका में निम्नलिखित प्रतिवादी होंगेः-
1. छततीसगढ़ राज्य 2. राज्य प्रदूशण नियंत्रण बोर्ड 3. निजी कारखाना 
जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है ?
जनहित याचिका ठीक उसी प्रकार से दायर की जाती है, जिस प्रकार से रिट (आदेश) याचिका दायर की जाती है।
उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया है ?
उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिए निम्नलिखित बातों का होना जरूरी हैः-
प्रत्येक याचिका की एक छायाप्रति होती है। यह छायाप्रति अधिवक्ता के लिए बनायी गई छायाप्रति या अधिवक्ता की छायाप्रति होती है। एक छायाप्रति प्रतिवादी को देनी होती है, और उस छायाप्रति की देय रसीद लेनी होती है। दूसरे चरण में जनहित याचिका की दो छायाप्रति, प्रतिवादी द्वारा प्राप्त की गई देय रसीद के साथ न्यायालय में होती है।
उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है ?
उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिका की पांच छायाप्रति दाखिल करनी होती है। प्रतिवादी को याचिका की छायाप्रति सूचना आदेश के पारित होने के बाद से ही की जाती है।
क्या साधारण पत्र के जरिए भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है ?
जनहित याचिका एक खत या पत्र के द्वारा भी दायर की जा सकती है, लेकिन यह याचिका तभी मान्य होगी, जब यह निम्नलिखित व्यक्ति या संस्था द्वारा दायर की गई हो।
  • व्यक्ति द्वारा - सामाजिक हित का भावना रखने वाले व्यक्ति द्वारा 
  • उन लोगों के अधिकार के लिए जो कि गरीबी या किसी और कारण से न्यायालय के समक्ष न्याय पाने के लिए नहीं आ सकते।

जनहित याचिका दायर होने के बाद का प्रारूप क्या होता है ?
जनहित याचिका में न्यायालय का प्रारूप प्रमुख रूप से दो प्रकार का होता है:-
  • सुनवाई के दौरान दिए गए आदेश, इनमें किसी औद्योगिक संस्था को बंद करने के आदेश, कैदी को जमानत पर छोड़ने के आदेश आदि होते हैं।
  • अंतिम आदेश जिसमें सुनवाई के दौरान दिए गए आदेशों एवं निर्देशों को लागू करने व समय सीमा जिसके अंदर लागू करना होता है।

क्या जनहित याचिका को दायर करने व उसकी सुनवाई के लिए वकील आवश्यक है ?
जनहित याचिका के लिए वकील जरूरी है और राष्ट्रीय राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत सरकार के द्वारा वकील की सेवाएं प्राप्त कराए जाने का भी प्रावधान है।
निम्नलिखित परिस्थितियों में भी जनहित याचिका दायर की सकती है -
  • जब गरीबों का न्यूनतम मानव अधिकारों का हनन हो रहा हो।
  • जब कोई सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों की पूर्ति न कर रहा हो।
  • जब धार्मिक अथवा संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो।
  • जब कोई कारखाना या औद्योगिक संस्थान वातावरण को प्रदूषित कर रहा हो।
  • जब सड़क में रोशनी (लाईट) की व्यवस्था न हो, जिससे आने-जाने वाले व्यक्तियों को तकलीफ हो।
  • जब कहीं रात में ऊंची आवाज में गाने बजाने के कारण ध्वनि प्रदूषण हो।
  • जहां निर्माण करने वाली कंपनी पेड़ों को काट रही हो और वातावरण प्रदूषित कर रही हो।
  • जब राज्य सरकार की अधिक कर लगाने की योजना से गरीब लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़े
  • जेल अधिकारियों के खिलाफ जेल सुधार के लिए।
  • बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के खिलाफ।
  • लैंगिक शोषण में महिलाओं के बचाव के लिए
  • सड़क एवं नालियों के रख-रखाव के लिए।
  • साम्प्रदायिक एकता बनाए रखने के लिए।
  • व्यस्त सड़कों से विज्ञापन के बोर्ड हटाने के लिए, ताकि यातायात में कठिनाई न हो।

जनहित याचिका से संबंधित उच्चतम न्यायालय के कुछ महत्वपूर्ण निर्णयः-
  • रूरल लिटिगेशन एण्ड इंटाइटलमेंट केंद्र बनाम उत्तरप्रदेश राज्य और रामशरण बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान न्यायालय को प्रक्रिया से संबंधित औपचारिकताओं में नहीं पड़ना चाहिए।
  • शीला बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिका को एक बार दायर करने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता।

7 comments:
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  1. बढ़िया ब्लौग़ । ब्लौग फौलोवर गैजेट भी लगायें ताकि फौलो किया जा सके ।

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’अहिंसक वीर क्रांतिकारी को नमन : ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  3. श्रीमान जी मुझे शिक्षा विभाग के विरुद्ध जन हित याचिका दायर करना है मुझे क्या करना चाहिए

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  4. सर जी मूलभूत हक्क का हनन हुआ है ऐसा कोई भी केस बतावो

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  5. संजीव जी कृपया ये बताए एक ही विभाग के कई कर्मचारियों के कारण जनसुरक्षा प्रभावित हो रही है ऐसी स्थिति में 1,पि आई एल लगाया जा सकता है क्या,२.पार्टी किसको बनाना होगा. 3. खर्च कितना लगता है

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  6. माननीय महोदय , छत्तीसगढ़ में 1998-99 से एक ही पद पर रहते हुए कार्य करने वाले शिक्षाकर्मियों की संख्या लगभग छः हजार है जिनमें से केवल लगभग 200 लोग विगत 2011से लगातार क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ ले रहे हैं ।जिनमें से कुछ ने कोर्ट में स्टे ले रखा है तो कुछ ने अपने निकायों में सर्व सम्मत प्रस्ताव करा रखा है ।
    ऐसे में हम बाकी के लोगों के क्रमोन्नति के अधिकार की सुरक्षा के लिए उचित मार्गदर्शन करें जिससे हमें जल्दी से जल्दी न्याय मिल सके ।

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  7. Sir mai eek awaas mitra hu aur hamare Kam ko Rojgar sahayak ko Diya ja raha hai koi upay bataye

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महत्वपूर्ण सूचना- इस ब्लॉग में उपलब्ध जिला न्यायालयों के न्याय निर्णय https://services.ecourts.gov.in से ली गई है। पीडीएफ रूप में उपलब्ध निर्णयों को रूपांतरित कर टेक्स्ट डेटा बनाने में पूरी सावधानी बरती गई है, फिर भी ब्लॉग मॉडरेटर पाठकों से यह अनुरोध करता है कि इस ब्लॉग में प्रकाशित न्याय निर्णयों की मूल प्रति को ही संदर्भ के रूप में स्वीकार करें। यहां उपलब्ध समस्त सामग्री बहुजन हिताय के उद्देश्य से ज्ञान के प्रसार हेतु प्रकाशित किया गया है जिसका कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं है।
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